raibarexpress Blog उत्तराखंड अब पतंजलि में होगी IAS-IPS की तैयारी, हरिद्वार में शुरू होगी सिविल सर्विस अकादमी..
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अब पतंजलि में होगी IAS-IPS की तैयारी, हरिद्वार में शुरू होगी सिविल सर्विस अकादमी..

अब पतंजलि में होगी IAS-IPS की तैयारी, हरिद्वार में शुरू होगी सिविल सर्विस अकादमी..

 

उत्तराखंड: देश में प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी को नया आयाम देने के उद्देश्य से पतंजलि ने सिविल सेवा अकादमी की स्थापना की घोषणा की है। इस पहल का लक्ष्य केवल आईएएस, आईपीएस और अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए अभ्यर्थियों को तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे प्रशासनिक अधिकारियों का निर्माण करना है जो भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरित होकर कार्य करें। अकादमी को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक प्रशासनिक आवश्यकताओं के समन्वय का केंद्र बताया जा रहा है। संस्थान का उद्देश्य भावी अधिकारियों में नेतृत्व क्षमता, संवेदनशीलता, कर्तव्यनिष्ठा और लोककल्याण की भावना विकसित करना होगा, ताकि वे प्रशासनिक जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।

‘त्रि-शिक्षा’ मॉडल पर आधारित होगी पढ़ाई

योग गुरु बाबा रामदेव ने इस पहल को शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि किसी भी देश की प्रशासनिक व्यवस्था केवल कानूनों और नियमों से नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने वाले अधिकारियों के चरित्र और दृष्टिकोण से मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि अकादमी में एक विशेष “त्रि-शिक्षा मॉडल” अपनाया जाएगा, जिसमें आध्यात्मिक ज्ञान, प्रशासनिक दक्षता और शैक्षणिक उत्कृष्टता का समन्वय होगा। उनके अनुसार यह मॉडल भारतीय वैदिक परंपरा से प्रेरित है और विद्यार्थियों को केवल परीक्षा में सफलता दिलाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें जिम्मेदार और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाला नागरिक बनाने का प्रयास करेगा।

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संगम

अकादमी का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसमें भारतीय इतिहास, संस्कृति, प्रशासनिक दर्शन और समकालीन विषयों को संतुलित रूप से शामिल किया जाएगा। संस्थान का शैक्षणिक ढांचा ‘विरासत और विज्ञान’ तथा ‘बोधि और शोध’ जैसे सिद्धांतों पर आधारित होगा, जिससे विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध दोनों का लाभ मिल सके। इसके साथ ही विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। योग, ध्यान और प्राणायाम को प्रशिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि अभ्यर्थियों में मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित हो सके।

प्रशासनिक सोच में बदलाव लाने का प्रयास

पूर्व आईएएस अधिकारी और शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. एन.पी. सिंह ने कहा कि भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था लंबे समय तक औपनिवेशिक प्रभाव से प्रभावित रही है, जहां शासन व्यवस्था का केंद्र नियंत्रण और प्रबंधन था। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता ऐसी प्रशासनिक सोच की है जो सेवा, संवेदनशीलता और जनकल्याण पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि अकादमी भारतीय संविधान की मूल भावना के अनुरूप प्रशासनिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी और भारतीय प्रशासनिक परंपराओं से जुड़े सिद्धांतों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। इससे भावी अधिकारियों में समाज के प्रति उत्तरदायित्व और कर्तव्यबोध को मजबूत किया जा सकेगा।

पतंजलि प्रबंधन के अनुसार देश के जाने-माने शिक्षाविद और सिविल सेवा मार्गदर्शक अवध ओझा अकादमी के शैक्षणिक नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाएंगे। प्रारंभिक चरण में वे विद्यार्थियों को इतिहास, व्यक्तित्व विकास और प्रेरणात्मक विषयों पर विशेष मार्गदर्शन देंगे। अवध ओझा ने कहा कि सिविल सेवा की तैयारी केवल तथ्यों और जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सही दृष्टिकोण और विवेक का विकास भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अकादमी का उद्देश्य विद्यार्थियों की सोच को व्यापक बनाना और उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि देश के विभिन्न प्रमुख शिक्षा केंद्रों और अनुभवी शिक्षकों के सहयोग से अभ्यर्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली तैयारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

राष्ट्र निर्माण में योगदान का लक्ष्य

अकादमी की स्थापना को शिक्षा, प्रशासन और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है। संस्थान का दावा है कि यहां तैयार होने वाले विद्यार्थी केवल सफल अधिकारी ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित नेतृत्वकर्ता भी बनेंगे। कार्यक्रम के दौरान पतंजलि विश्वविद्यालय से जुड़े कई वरिष्ठ शिक्षाविद और अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने इस पहल को भारतीय शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रयोग बताया, जो भविष्य में देश की प्रशासनिक संरचना को नई दिशा देने में सहायक साबित हो सकता है।

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