July 16, 2026
उत्तराखंड

पिथौरागढ़ के कॉमर्शियल वाहन चालकों पर बढ़ा बोझ, फिटनेस के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर मजबूरी..

पिथौरागढ़ के कॉमर्शियल वाहन चालकों पर बढ़ा बोझ, फिटनेस के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर मजबूरी..

 

 

 

उत्तराखंड: पिथौरागढ़ जिले में कॉमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच की व्यवस्था बंद होने से वाहन स्वामियों और चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब जिले के टैक्सी, मैक्सी कैब और अन्य व्यावसायिक वाहन संचालकों को फिटनेस प्रमाण पत्र के लिए 150 किलोमीटर दूर टनकपुर या करीब 200 किलोमीटर दूर हल्द्वानी स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का रुख करना पड़ेगा। इससे सीमांत क्षेत्र के वाहन स्वामियों पर अतिरिक्त समय और आर्थिक भार बढ़ गया है। दरअसल, कॉमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। पिथौरागढ़ जिले में अभी तक ऐसा स्टेशन शुरू नहीं हो पाया है। वाहन स्वामियों को राहत देने के लिए एआरटीओ कार्यालय में हीवाहन चालकों को फिटनेस के लिए लगाने होंगे टनकपुर और हल्द्वानी के चक्कर, व्यवस्था से खफा

फिटनेस जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही थी, लेकिन अब शासन स्तर से इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। जिले के चंडाक क्षेत्र में करीब 10.11 करोड़ रुपये की लागत से ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का निर्माण प्रस्तावित है। दो साल पहले शुरू हुआ यह काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इसके चलते स्थानीय वाहन संचालकों को मजबूरी में जिले से बाहर जाकर फिटनेस करानी पड़ेगी। पिथौरागढ़ जिले में करीब पांच हजार कॉमर्शियल वाहन पंजीकृत हैं। वाहन स्वामियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर सुविधा बंद होने से उन्हें लंबी दूरी तय करनी होगी, जिससे ईंधन खर्च के साथ समय की भी बर्बादी होगी। खासतौर पर मुनस्यारी, धारचूला, बेरीनाग और डीडीहाट जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के टैक्सी चालकों के लिए यह समस्या और बढ़ गई है।

टैक्सी यूनियन ने स्थानीय स्तर पर पहले की तरह फिटनेस सुविधा बहाल करने की मांग की है। यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक एआरटीओ कार्यालय में फिटनेस जांच की व्यवस्था जारी रखी जानी चाहिए। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन और चक्का जाम की चेतावनी भी दी गई है। वहीं, परिवहन विभाग का कहना है कि कॉमर्शियल वाहनों की फिटनेस के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन जरूरी है। विभाग के अनुसार जिले में टेस्टिंग स्टेशन का काम अंतिम चरण में है और इसके शुरू होने के बाद वाहन स्वामियों की परेशानी कम हो जाएगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जल्द समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि सीमांत जिले में परिवहन व्यवस्था से जुड़े लोगों को राहत देने के लिए जल्द वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।

 

 

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