raibarexpress Blog उत्तराखंड चारधाम यात्रा- बारिश बढ़ते ही बंद होगा हेली शटल संचालन, बसों की संख्या पर भी होगा फैसला..
उत्तराखंड

चारधाम यात्रा- बारिश बढ़ते ही बंद होगा हेली शटल संचालन, बसों की संख्या पर भी होगा फैसला..

चारधाम यात्रा- बारिश बढ़ते ही बंद होगा हेली शटल संचालन, बसों की संख्या पर भी होगा फैसला..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में मानसून के आगमन की संभावनाओं के बीच चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार राज्य में जून के तीसरे सप्ताह के आसपास मानसून सक्रिय हो सकता है। इसके मद्देनजर नागरिक उड्डयन विभाग, परिवहन निगम और आपदा प्रबंधन विभाग ने यात्रा संचालन को लेकर अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। हर वर्ष मानसून सीजन शुरू होने के बाद चारधाम यात्रा की रफ्तार कुछ धीमी पड़ जाती है। मौसम की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों, भूस्खलन की आशंकाओं और यात्रियों की संख्या में कमी को देखते हुए परिवहन और हवाई सेवाओं में आवश्यक बदलाव किए जाते हैं। इस बार भी यही व्यवस्था लागू किए जाने की तैयारी है।

केदारनाथ धाम के लिए संचालित हेली सेवाएं श्रद्धालुओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। यात्रा सीजन की शुरुआत के साथ ही हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन शुरू कर दिया गया था और पहले चरण की टिकट बुकिंग निर्धारित अवधि तक जारी रही। अब विभाग मानसून से पहले के शेष दिनों के लिए टिकट बुकिंग का नया चरण शुरू करने की तैयारी में है। अधिकारियों के अनुसार मौसम की स्थिति और यात्रियों की मांग का आकलन करने के बाद आगामी दिनों के लिए बुकिंग खोली जाएगी, ताकि श्रद्धालु समय रहते अपनी यात्रा की योजना बना सकें। हालांकि मानसून के सक्रिय होने के बाद सुरक्षा कारणों से नियमित हेली सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा। खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण हर वर्ष यह कदम उठाया जाता है। नियमित उड़ानों के बंद होने के बावजूद केदारनाथ क्षेत्र में एक हेलीकॉप्टर को आपातकालीन सेवाओं के लिए तैयार रखा जाएगा। किसी भी आपदा, स्वास्थ्य आपात स्थिति या बचाव अभियान की जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यात्रा मार्गों पर मौसम की निगरानी लगातार की जा रही है और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

मानसून सीजन में आमतौर पर चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कमी देखी जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए परिवहन निगम ने भी लचीली रणनीति अपनाई है। वर्तमान में ऋषिकेश और हरिद्वार से चारधाम यात्रा के लिए नियमित बस सेवाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन आगे यात्रियों की संख्या के आधार पर बसों की संख्या में बदलाव किया जा सकता है। यदि यात्रा मार्गों पर यात्रियों की संख्या अधिक रहती है तो अतिरिक्त और रिजर्व बसों को भी सेवा में लगाया जाएगा। वहीं मांग कम होने की स्थिति में बसों को वापस उनके मूल रूटों पर भेज दिया जाएगा, ताकि अन्य क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं प्रभावित न हों।

परिवहन विभाग ने मानसून के दौरान संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए भी विशेष योजना बनाई है। यदि किसी क्षेत्र में भूस्खलन, सड़क अवरोध या अन्य कारणों से यात्री फंस जाते हैं तो जिला प्रशासन और परिवहन विभाग के समन्वय से अतिरिक्त बसें उपलब्ध कराई जाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान यात्रियों की सुरक्षा और त्वरित राहत व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए परिवहन संसाधनों को तैयार रखा जाएगा।

मानसून को देखते हुए राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र भी पूरी तरह सक्रिय है। विभिन्न विभागों के साथ लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं और संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार की जा रही है। राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नियमित मॉक ड्रिल, समीक्षा बैठकें और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। चारधाम यात्रा के दौरान प्रशासन का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा उपलब्ध कराना है। मानसून के दौरान मौसम संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं, इसलिए यात्रा मार्गों, पार्किंग स्थलों, राहत केंद्रों और आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है।

 

 

 

Exit mobile version