औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के नए कुलपति बने डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के उच्च शिक्षा और कृषि अनुसंधान क्षेत्र से जुड़ी एक महत्वपूर्ण नियुक्ति में डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट को वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार (पौड़ी गढ़वाल) का नया कुलपति नियुक्त किया गया है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) Gurmit Singh ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। जारी आदेश के अनुसार डॉ. भट्ट की नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि अथवा अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, के लिए प्रभावी रहेगी। वर्तमान में वह Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर), नई दिल्ली में विशेष कार्याधिकारी (OSD) के पद पर कार्यरत हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति पद के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत गठित सर्च एवं चयन समिति द्वारा विभिन्न नामों का पैनल कुलाधिपति को भेजा गया था। विशेषज्ञों द्वारा किए गए मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया के बाद डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट को इस महत्वपूर्ण पद के लिए चुना गया। कृषि, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और अनुसंधान प्रशासन के क्षेत्र में लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें विश्वविद्यालय की कमान सौंपी गई है। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय अनुसंधान, नवाचार और कृषि शिक्षा के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर सकता है।
डॉ. भट्ट एमएससी और पीएचडी की शैक्षणिक योग्यता रखते हैं तथा उन्हें शिक्षण और अनुसंधान क्षेत्र में लगभग दो दशक का अनुभव प्राप्त है। प्रोफेसर के रूप में उन्होंने 19 वर्षों से अधिक समय तक विभिन्न शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों का नेतृत्व किया है। इसके अलावा उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित कृषि एवं अनुसंधान संस्थानों में वरिष्ठ प्रशासनिक और वैज्ञानिक पदों पर भी कार्य किया है। कृषि अनुसंधान, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संस्थागत नेतृत्व के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता व्यापक मानी जाती है। अपने लंबे करियर के दौरान डॉ. भट्ट ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की विभिन्न इकाइयों और संस्थानों में अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह मेघालय स्थित संस्थान में संयुक्त निदेशक, पटना में निदेशक तथा विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की परियोजनाओं में विशेष कार्याधिकारी के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा नई दिल्ली में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन प्रभाग, अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े विभागों और कृषि अनुसंधान से संबंधित प्रमुख इकाइयों में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देहरादून स्थित भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान में निदेशक के रूप में भी उनकी सेवाएं उल्लेखनीय रही हैं।
डॉ. भट्ट का नाम देश के प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों में लिया जाता है। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में 277 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। इसके अलावा पुस्तक अध्याय, तकनीकी बुलेटिन, प्रशिक्षण पुस्तिकाएं, नीति दस्तावेज और अन्य वैज्ञानिक प्रकाशनों में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में कई शोध परियोजनाएं सफलतापूर्वक संचालित हुई हैं। कृषि, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और सतत विकास जैसे विषयों पर उनका कार्य व्यापक रूप से सराहा गया है।
शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए डॉ. भट्ट को विभिन्न राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा 18 राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए जा चुके हैं। इसके अलावा उन्हें चार प्रतिष्ठित फेलोशिप भी प्राप्त हैं, जो कृषि और विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान को दर्शाती हैं। वह राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी, राष्ट्रीय पारिस्थितिकी संस्थान, राष्ट्रीय आधारभूत विज्ञान अकादमी और भारतीय कृषि वानिकी सोसायटी के फेलो भी हैं। इसके साथ ही उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के आयोजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. भट्ट के अनुभव का लाभ विश्वविद्यालय को मिलेगा। विशेष रूप से उद्यानिकी, वानिकी, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और कृषि नवाचार के क्षेत्रों में नई पहल देखने को मिल सकती हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब उत्तराखंड में कृषि आधारित अनुसंधान, जलवायु अनुकूल खेती, बागवानी और पर्वतीय कृषि को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

