May 29, 2026
उत्तराखंड

उपनल कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सरकार को न्यूनतम वेतनमान देने के निर्देश..

उपनल कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सरकार को न्यूनतम वेतनमान देने के निर्देश..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से कार्यरत उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला एक बार फिर नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचा। कर्मचारियों को नियमित न किए जाने, चयनित वेतनमान का लाभ नहीं देने और वेतन से जीएसटी कटौती किए जाने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि कर्मचारियों को पहले न्यूनतम वेतनमान दिया जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 जून को होगी।

यह सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई। कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि उपनल कर्मचारियों के स्थान पर प्रस्तावित नई नियुक्तियों की प्रक्रिया फिलहाल वापस ले ली गई है। सरकार ने यह भी कहा कि यदि कर्मचारी अन्य अतिरिक्त मांगें नहीं करते हैं, तो उन्हें न्यूनतम वेतनमान देने के लिए सरकार तैयार है। सुनवाई के दौरान उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ की ओर से यह भी दलील दी गई कि वर्ष 2013 की नियमावली के तहत स्कंद पुष्प केंद्र में कार्यरत उपनल कर्मचारियों को नियमित किया गया था। ऐसे में समान परिस्थितियों में कार्य कर रहे अन्य उपनल कर्मचारियों को भी उसी आधार पर नियमित किया जाना चाहिए।

संघ के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर आदेश जारी किया था, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक उस आदेश पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। इतना ही नहीं, सरकार की ओर से उस आदेश को हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी प्रस्तुत नहीं किया गया है। कर्मचारी संघ की ओर से यह भी कहा गया कि लंबे समय से विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे उपनल कर्मियों को अभी तक स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें चयनित वेतनमान का लाभ नहीं दिया जा रहा, जबकि वे वर्षों से नियमित प्रकृति का कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा उनके वेतन से जीएसटी कटौती किए जाने को भी गलत बताया गया।

मामले में संघ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अवमानना याचिका को प्राथमिकता के आधार पर सुनने की मांग की थी। यह याचिका ‘उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ बनाम आनंद बर्धन, मुख्य सचिव उत्तराखंड’ शीर्षक से दायर की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि जब समान परिस्थितियों में पहले कुछ उपनल कर्मचारियों को नियमित किया जा चुका है, तो बाकी कर्मचारियों के मामले को कैबिनेट में लंबित रखने की आवश्यकता क्यों है। कोर्ट की इस टिप्पणी को कर्मचारियों के पक्ष में अहम माना जा रहा है। उत्तराखंड में उपनल के माध्यम से हजारों कर्मचारी विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, लोक निर्माण, सचिवालय और अन्य कई विभाग शामिल हैं। लंबे समय से ये कर्मचारी नियमितीकरण और समान वेतनमान की मांग उठा रहे हैं। अब हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद उपनल कर्मचारियों में उम्मीद जगी है कि सरकार जल्द इस मामले में ठोस निर्णय ले सकती है। वहीं कर्मचारियों की निगाहें अब 9 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

 

 

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