बिजली बचाने की मुहिम तेज, दफ्तरों में एसी पर लगाम और कारपूलिंग को बढ़ावा..
उत्तराखंड: ऊर्जा संरक्षण, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और खर्चों में कटौती के उद्देश्य से उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने अपने कार्यालयों और कर्मचारियों के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत बिजली की खपत कम करने, ईंधन बचाने, सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग और कार्य संस्कृति में बदलाव लाने पर विशेष फोकस किया गया है। यूपीसीएल द्वारा जारी निर्देशों में कार्यालयों में ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करने के लिए कई सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत सभी कार्यालयों और भवनों में एयर कंडीशनर का तापमान निर्धारित सीमा के भीतर रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों को एसी का उपयोग कम से कम करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जबकि अनावश्यक बिजली खपत पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
कार्यालय परिसरों में गैर-जरूरी लाइटिंग, सजावटी रोशनी और अतिरिक्त बिजली उपकरणों के उपयोग को सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य यह है कि सरकारी संस्थानों में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा दिया जाए और बिजली की अनावश्यक खपत को रोका जा सके। नई व्यवस्था में परिवहन संबंधी नियमों को भी शामिल किया गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों को निजी वाहनों के बजाय साझा परिवहन व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कारपूलिंग को बढ़ावा देने के साथ-साथ कर्मचारी बस सेवा के उपयोग पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों को साइकिल से कार्यालय आने-जाने के लिए प्रेरित करने की योजना भी बनाई गई है।
निर्देशों के अनुसार सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभागीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलेगी। यूपीसीएल ने सरकारी खर्चों में कमी लाने के लिए यात्राओं से संबंधित नियमों में भी बदलाव किया है। गैर-जरूरी घरेलू और विदेशी दौरों पर फिलहाल रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। इसके स्थान पर डिजिटल माध्यमों का अधिक उपयोग करने पर जोर दिया गया है। विभागीय बैठकों और समीक्षा कार्यक्रमों के लिए वर्चुअल प्लेटफॉर्म और हाइब्रिड गवर्नेंस मॉडल को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्यालयी समय के बेहतर उपयोग को लेकर भी विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि वे भोजनावकाश के दौरान अनावश्यक रूप से कार्यालय परिसर से बाहर न जाएं। इससे समय की बचत होने के साथ-साथ ईंधन की खपत में भी कमी आएगी। सरकारी खरीद प्रक्रिया में भी आत्मनिर्भर भारत और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की नीति को शामिल किया गया है। सभी खरीद प्रक्रियाओं में ‘मेक इन इंडिया’ मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। त्योहारों और विशेष अवसरों पर स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों तथा जीआई टैग प्राप्त वस्तुओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है, जिससे स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों को प्रोत्साहन मिल सके।
कर्मचारियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कार्यालय कैंटीनों की भोजन व्यवस्था की भी समीक्षा की जाएगी। विशेष रूप से खाद्य पदार्थों में तेल की मात्रा कम करने और संतुलित आहार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। कर्मचारियों के बीच स्वास्थ्यवर्धक खानपान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी अभियान चलाने की योजना है। यूपीसीएल का मानना है कि इन उपायों से ऊर्जा संरक्षण, वित्तीय बचत, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर कार्य संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

