July 9, 2026
उत्तराखंड

उत्तराखंड को मिला पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा, राज्यपाल ने प्रस्ताव को दी मंजूरी..

उत्तराखंड को मिला पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा, राज्यपाल ने प्रस्ताव को दी मंजूरी..

 

 

उत्तराखंड: शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और केंद्र सरकार के उल्लास (ULLAS–Understanding of Lifelong Learning for All in Society) नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के निर्धारित मानकों को पूरा करते हुए उत्तराखंड को आधिकारिक रूप से पूर्ण साक्षर राज्य घोषित कर दिया गया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने इस संबंध में स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही उत्तराखंड देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है।इस उपलब्धि से पहले मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम पूर्ण साक्षर राज्यों की सूची में शामिल थे। अब उत्तराखंड भी इस सूची में शामिल होकर शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बनाने में सफल हुआ है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित किए जाने पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे उत्तराखंड के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल सरकार के प्रयासों का परिणाम नहीं, बल्कि प्रदेश के नागरिकों, शिक्षकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों का प्रतिफल है।

सीएम ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, कौशल विकास और आजीवन शिक्षा जैसी योजनाओं को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी। केंद्र सरकार के नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (ULLAS) के दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि किसी राज्य की साक्षरता दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाती है, तो उसे पूर्ण साक्षर राज्य माना जाता है। उत्तराखंड ने इस मानक को पार करते हुए 98.7 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल की है। इसी आधार पर राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित किया गया है। शिक्षा विभाग के अनुसार यह उपलब्धि व्यापक साक्षरता अभियानों, जनभागीदारी और शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का परिणाम है।

प्रस्ताव के बाद मिली मंजूरी

राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने की प्रक्रिया काफी समय से चल रही थी। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा गया था। प्रस्ताव में संशोधित राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप राज्य की साक्षरता स्थिति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी राज्य या देश के लिए 100 प्रतिशत साक्षरता प्राप्त करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। बढ़ती आयु, गंभीर बीमारियां, मानसिक एवं बौद्धिक अक्षमता जैसे कारणों से कुछ लोग साक्षरता अभियानों से जुड़ नहीं पाते। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 95 प्रतिशत साक्षरता को पूर्ण साक्षरता का मानक निर्धारित किया है।

आंकड़ों ने दिलाई बड़ी उपलब्धि

उल्लास कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025 के लिए किए गए आकलन के अनुसार सात वर्ष से कम आयु के बच्चों को छोड़कर उत्तराखंड की पात्र आबादी 1 करोड़ 23 लाख 4 हजार 601 आंकी गई। इसमें केवल 1 लाख 31 हजार 986 लोग ऐसे पाए गए जो अभी भी निरक्षर श्रेणी में आते हैं। यह संख्या कुल पात्र आबादी का लगभग 1.3 प्रतिशत है। यानी राज्य के 98 प्रतिशत से अधिक नागरिक पढ़ने-लिखने की क्षमता रखते हैं, जिसने उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जाने का आधार प्रदान किया। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस उपलब्धि को प्रत्येक उत्तराखंडवासी के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आजीवन सीखने की संस्कृति और प्रत्येक नागरिक तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्ण साक्षर राज्य बनने से उत्तराखंड को शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता और सामाजिक विकास के क्षेत्र में नई गति मिलेगी। यह उपलब्धि विकसित उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

कम समय में साक्षरता दर में बड़ी छलांग..

उत्तराखंड ने पिछले कुछ वर्षों में साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2023-24 में राज्य की साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत थी, जो विभिन्न साक्षरता अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और शिक्षा विभाग के प्रयासों के चलते वर्ष 2025 में बढ़कर 98.7 प्रतिशत तक पहुंच गई। इतने कम समय में साक्षरता दर में हुई यह वृद्धि उत्तराखंड को उन राज्यों की श्रेणी में खड़ा करती है, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में तेज़ी से सुधार दर्ज किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भविष्य में राज्य की सामाजिक, आर्थिक और डिजिटल प्रगति को भी नई दिशा देने का काम करेगी।

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