देहरादून-हरिद्वार हाईवे पर बदलेगी तस्वीर, 7 फ्लाईओवर और सर्विस लेन से सफर होगा सुरक्षित..
उत्तराखंड: देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने बड़े स्तर पर सुरक्षा सुधार कार्य शुरू कर दिए हैं। करीब 319 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई इस रोड सेफ्टी परियोजना का उद्देश्य दुर्घटनाओं में कमी लाना, ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाना और यात्रियों के लिए सफर को अधिक सुरक्षित बनाना है। एनएचएआई के अनुसार, वर्ष 2020 में इस हाईवे को दो लेन से फोरलेन में परिवर्तित किया गया था। सड़क चौड़ी होने के बाद वाहनों की आवाजाही और रफ्तार दोनों बढ़ीं, लेकिन इसके साथ दुर्घटनाओं के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई। रोड सेफ्टी ऑडिट में कई स्थानों को दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया, जिसके बाद व्यापक सुरक्षा सुधार योजना तैयार की गई।
सात नए फ्लाईओवर से सुधरेगी यातायात व्यवस्था
नई परियोजना के तहत हाईवे पर सात फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। इनमें जाखन पुल (डेंटल कॉलेज के समीप), जीवनगढ़ में दो फ्लाईओवर, मियांवाला, छिद्दरवाला तथा रायवाला में दो फ्लाईओवर शामिल हैं। सबसे बड़ा फ्लाईओवर मियांवाला से नकरौंदा के बीच बनाया जाएगा, जिसकी लंबाई करीब 2.25 किलोमीटर होगी। इन फ्लाईओवरों के निर्माण से प्रमुख चौराहों पर जाम की समस्या कम होगी और स्थानीय व लंबी दूरी के वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी।
दोनों ओर बनेगी 44 किलोमीटर लंबी सर्विस लेन
परियोजना के तहत हाईवे के दोनों किनारों पर लगभग 44 किलोमीटर लंबी सर्विस लेन भी विकसित की जाएगी। इससे स्थानीय यातायात को मुख्य हाईवे से अलग रखा जा सकेगा, जिससे तेज रफ्तार वाहनों और स्थानीय ट्रैफिक के बीच टकराव की संभावना कम होगी। इसके साथ ही पैदल यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दो फुट ओवरब्रिज भी बनाए जाएंगे। इनके निर्माण स्थल जल्द तय किए जाएंगे। एनएचएआई के अनुसार मियांवाला, जीवनगढ़ और छिद्दरवाला समेत कई स्थानों पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। पूरी परियोजना को लगभग ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
पुरानी सड़क बंद, एलिवेटेड कॉरिडोर से गुजरेंगे वाहन
देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद डाटकाली से गणेशपुर तक की पुरानी सड़क को सामान्य यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। अब केवल मोहंड गांव तक ही पुराने मार्ग से वाहनों की आवाजाही की अनुमति है। इसके आगे सभी वाहनों को एलिवेटेड कॉरिडोर का उपयोग करना होगा। एनएचएआई का कहना है कि डाटकाली से गणेशपुर के बीच करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसी वजह से पुरानी सड़क वन विभाग को सौंप दी गई है, ताकि जंगल क्षेत्र में वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही प्रभावित न हो। पुरानी सड़क बंद किए जाने के फैसले का कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया है। डाटकाली और गणेशपुर क्षेत्र में एक्सप्रेसवे के उपयोग को लेकर लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। इस दौरान कुछ स्थानों पर कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच कहासुनी की घटनाएं भी सामने आईं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार डाटकाली के समीप एलिवेटेड कॉरिडोर पर अभी कुछ निर्माण कार्य जारी है। मानसून के दौरान पहाड़ी से मलबा गिरने की आशंका को देखते हुए एहतियातन फिलहाल एक लेन पर यातायात संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यातायात व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य कर दिया जाएगा।


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