लेबर सेस और खर्चों की बुकिंग में लापरवाही पर UPCL सख्त, कार्रवाई की चेतावनी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने राज्य में संचालित बिजली परियोजनाओं में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। निगम ने परियोजनाओं के खर्चों की बुकिंग, लेबर सेस (श्रम उपकर) के अनुपालन और संपत्तियों के पूंजीकरण को लेकर सभी संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। यूपीसीएल ने साफ कर दिया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या वित्तीय गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। यूपीसीएल के निदेशक (वितरण एवं परियोजना) एमआर आर्य की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि बिजली परियोजनाओं से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए। निगम का कहना है कि खर्चों की गलत बुकिंग, तकनीकी क्लोजर में देरी या लेबर सेस खातों में अनियमितता के कारण गंभीर ऑडिट आपत्तियां और विनियामक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही इससे वित्तीय रिपोर्टिंग भी प्रभावित होगी।
निर्देशों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में ईआरपी (सैप) सिस्टम के तहत तैयार की जाने वाली परियोजनाओं में लेबर सेस का सही अनुपालन अनिवार्य किया गया है। यूपीसीएल ने कहा है कि 19 मई तक तैयार किए गए आकलनों में बिजली निरीक्षक शुल्क, सड़क कटिंग शुल्क, वन स्वीकृति शुल्क, आकस्मिक शुल्क और सेंटेज शुल्क की कुल लागत का एक प्रतिशत लेबर सेस के रूप में दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही डिपॉजिट कार्यों में भी नियमों को और स्पष्ट किया गया है। निगम के अनुसार इन परियोजनाओं में उपरोक्त शुल्कों के साथ-साथ यूपीसीएल द्वारा उपलब्ध कराए गए केंद्रीकृत और विकेंद्रीकृत निर्माण सामग्री पर भी एक प्रतिशत की दर से लेबर सेस लागू होगा। हालांकि यह नियम ठेकेदारों द्वारा लाई गई सामग्री पर लागू नहीं होगा।
यूपीसीएल ने परियोजनाओं के तकनीकी क्लोजर को भी अनिवार्य कर दिया है। जिन परियोजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है, उन्हें समय पर तकनीकी रूप से बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। ईआरपी सिस्टम में संबंधित संपत्तियों का पूरा विवरण दर्ज करना भी अनिवार्य होगा। इसमें सामग्री का विवरण, संख्या, लंबाई, वजन, मूल्य, निर्माण कंपनी और लोकेशन जैसी जानकारी शामिल की जाएगी। निगम ने स्पष्ट किया है कि यह डेटा उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग को भी भेजा जाना है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की त्रुटि स्वीकार नहीं की जाएगी। साथ ही यदि किसी परियोजना की अनुमानित लागत और वास्तविक खर्च के बीच असामान्य अंतर पाया जाता है, तो उसकी विस्तृत जांच और विश्लेषण किया जाएगा। यूपीसीएल ने हाई टेंशन से जुड़े कार्यों के लिए भी नियमों को और सख्त बना दिया है। निगम का उद्देश्य परियोजनाओं में वित्तीय अनुशासन बनाए रखना, पारदर्शिता बढ़ाना और भविष्य में ऑडिट या नियामक स्तर पर आने वाली समस्याओं को रोकना बताया जा रहा है।

