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ग्रामीणों की परेशानी समझ विधायक ने उठाया कदम, तारागड़ा गांव को मिली नाव..

ग्रामीणों की परेशानी समझ विधायक ने उठाया कदम, तारागड़ा गांव को मिली नाव..

 

 

 

 

उत्तराखंड: सीमांत जिला पिथौरागढ़ के नेपाल सीमा से सटे तारागड़ा गांव के ग्रामीणों को आपदा के बाद आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले वर्ष आई आपदा में तारागड़ा गांव को चंपावत जिले के लोहाघाट से जोड़ने वाला पैदल मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद यह रास्ता अब तक नहीं बन सका है, जिससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो गई है। तारागड़ा गांव पंचेश्वर क्षेत्र में स्थित है और भौगोलिक रूप से लोहाघाट की सीमा से सटा हुआ है। गांव के अधिकांश लोग खरीदारी, इलाज, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए लोहाघाट बाजार पर निर्भर हैं। पैदल मार्ग टूटने के बाद ग्रामीणों के सामने बाजार पहुंचने का कोई सुरक्षित विकल्प नहीं बचा। मजबूरी में लोगों को चट्टानों और खतरनाक रास्तों से होकर आवाजाही करनी पड़ रही थी, जिससे हर वक्त दुर्घटना का खतरा बना रहता था।

ग्रामीणों की इस समस्या को देखते हुए पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर स्वयं दूरस्थ सीमांत क्षेत्र पंचेश्वर के तारागड़ा गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को पंचेश्वर नदी पार कर सुरक्षित आवाजाही के लिए एक नाव भेंट की। इसके साथ ही यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लाइफ जैकेट भी प्रदान की गई, ताकि नदी पार करते समय किसी भी प्रकार का जोखिम न हो। बता दे कि पैदल रास्ता टूटने के बाद पंचेश्वर नदी के जरिए लोहाघाट पहुंचना ही ग्रामीणों के लिए एकमात्र विकल्प बचा था, लेकिन नाव की व्यवस्था न होने से यह भी आसान नहीं था। बीते दिनों ग्रामीणों ने अपनी परेशानी विधायक के सामने रखी थी। ग्रामीणों की मांग और जरूरत को समझते हुए विधायक मयूख महर ने अपने निजी खर्च से नाव तैयार करवाई और इसे गांव के लोगों को सौंप दिया।

इस मौके पर विधायक मयूख महर ने कहा कि तारागड़ा जैसे सीमांत गांवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी सबसे बड़ी समस्या है। आपदा में क्षतिग्रस्त हुए पैदल रास्ते को अब तक ठीक नहीं किया जाना सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन का विकल्प देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जनता की परेशानी का समाधान करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

ग्रामीणों का कहना है कि लोहाघाट बाजार उनके गांव के काफी नजदीक है, जबकि पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए उन्हें 500 रुपये से अधिक किराया चुकाना पड़ता है। ऐसे में हर छोटे-बड़े काम के लिए लोहाघाट जाना मजबूरी है। पैदल रास्ता टूटने के बाद किसी भी सामान को लाने या ले जाने के लिए एक तरफ का 100 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है, जो गरीब ग्रामीणों के लिए भारी पड़ रहा है। तारागड़ा के ग्रामीणों ने विधायक द्वारा दी गई नाव और लाइफ जैकेट के लिए आभार जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उनकी रोजमर्रा की आवाजाही अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और आसान हो सकेगी। हालांकि, उन्होंने सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग के स्थायी निर्माण की भी मांग की है, ताकि उन्हें भविष्य में ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। सीमांत क्षेत्रों में आपदा के बाद भी अधूरे पड़े विकास कार्यों ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल तारागड़ा गांव के लिए नाव राहत का साधन बनी है, लेकिन ग्रामीणों की उम्मीद अब स्थायी समाधान पर टिकी है।

 

 

 

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