raibarexpress Blog उत्तराखंड राष्ट्रपति भवन पहुंचकर गदगद हुए एकलव्य विद्यालयों के छात्र, द्रौपदी मुर्मु से हुई मुलाकात..
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राष्ट्रपति भवन पहुंचकर गदगद हुए एकलव्य विद्यालयों के छात्र, द्रौपदी मुर्मु से हुई मुलाकात..

राष्ट्रपति भवन पहुंचकर गदगद हुए एकलव्य विद्यालयों के छात्र, द्रौपदी मुर्मु से हुई मुलाकात..

 

 

उत्तराखंड: देहरादून जिले के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के लिए दिल्ली का तीन दिवसीय शैक्षणिक दौरा खास अनुभवों से भरा रहा। चकराता, मेहरावना और कालसी स्थित विद्यालयों के विद्यार्थियों ने 28 से 30 अगस्त 2026 तक नई दिल्ली का भ्रमण किया। इस शैक्षणिक यात्रा में तीनों विद्यालयों से पांच-पांच विद्यार्थियों ने भाग लिया। यात्रा के दौरान विद्यार्थियों को राष्ट्रपति भवन जाने और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने का अवसर मिला। राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत ने छात्रों के इस दौरे को यादगार बना दिया। इस मुलाकात से विद्यार्थियों को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के बारे में करीब से जानने का अवसर मिला।राष्ट्रपति से संवाद के अनुभव ने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उनमें देश के प्रति जिम्मेदारी, सेवा और समर्पण की भावना को भी मजबूत किया।

दिल्ली प्रवास के दौरान विद्यार्थियों ने राजधानी के कई ऐतिहासिक, शैक्षणिक और ज्ञानवर्धक स्थानों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें किताबों में पढ़े इतिहास और देश की विरासत को प्रत्यक्ष रूप से देखने-समझने का मौका मिला। यात्रा के जरिए विद्यार्थियों ने भारतीय इतिहास, संस्कृति, लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय विरासत से जुड़े विभिन्न पहलुओं को करीब से जाना। इससे उनके सामान्य ज्ञान के साथ-साथ सीखने के अनुभव को भी विस्तार मिला।

सर्वांगीण विकास में मददगार हैं ऐसे भ्रमण
जिला जनजाति कल्याण अधिकारी, देहरादून के अनुसार, विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभव बच्चों के आत्मविश्वास को मजबूत करने और उनमें राष्ट्रीय चेतना विकसित करने में मदद करते हैं। राष्ट्रपति भवन का दौरा और राष्ट्रपति से मुलाकात विद्यार्थियों के लिए गौरव का विषय होने के साथ उनके भविष्य के लिए प्रेरणादायी अनुभव भी साबित होगा। तीन दिनों की इस यात्रा के दौरान मिले अनुभवों ने एकलव्य विद्यालयों के विद्यार्थियों को कक्षा की पढ़ाई से बाहर निकलकर देश की विरासत और लोकतांत्रिक व्यवस्था को करीब से समझने का अवसर दिया.

 

 

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