उत्तराखंड में 12 हजार से ज्यादा शिक्षक पद खाली, सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर असर..
उत्तराखंड: उत्तराखंड की सरकारी शिक्षा व्यवस्था इस समय गंभीर शिक्षक संकट का सामना कर रही है। बेसिक शिक्षा से लेकर राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य स्तर तक कुल 12,327 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इसका सबसे अधिक असर पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों पर पड़ रहा है, जहां कई स्कूल विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के बिना संचालित हो रहे हैं। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के 3501 प्राथमिक विद्यालय केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे विद्यालयों में एक ही शिक्षक को सभी कक्षाओं और विषयों की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
शिक्षकों की कमी के साथ-साथ कार्यरत शिक्षकों पर अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में शिक्षकों को जनगणना, भवन गणना, एसआईआर सहित करीब 13 अलग-अलग सरकारी अभियानों में लगाया जा रहा है। इससे स्कूलों में नियमित शिक्षण कार्य बाधित हो रहा है और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में कठिनाई आ रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट के लिए केवल शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उनका आरोप है कि विभाग वर्षों से रिक्त पदों को भरने और पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में गंभीरता नहीं दिखा रहा। इससे शिक्षकों का मनोबल भी प्रभावित हो रहा है।
प्रदेश में पिछले छह वर्षों से पदोन्नति प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी हुई है। वरिष्ठता विवाद के समाधान में विभागीय स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका, जिसके चलते शिक्षकों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अब विभाग न्यायालय में मामला लंबित होने का हवाला देकर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा रहा है। हालांकि एलटी संवर्ग के 17,460 पदों को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं बताया जा रहा। शिक्षकों और कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि एलटी शिक्षकों को पदोन्नति दी जाए तो प्रवक्ता संवर्ग के 4,745 रिक्त पदों को भरा जा सकता है, जिससे माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को काफी राहत मिलेगी।
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा निदेशालय अलग-अलग संचालित होने के बावजूद माध्यमिक शिक्षकों की पदोन्नति यह कहकर रोकी जा रही है कि वे प्रारंभिक कक्षाओं में भी अध्यापन कार्य करते हैं। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि अधिकारी समस्या से अवगत होने के बावजूद समाधान की दिशा में सक्रियता नहीं दिखा रहे। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते रिक्त पदों को भरने और पदोन्नति प्रक्रिया को गति देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सरकारी विद्यालयों की स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर पड़ेगा।
रिक्त पदों की स्थिति
प्रारंभिक शिक्षा- सहायक अध्यापक 2717 एवं प्रधानाध्यापक 621
माध्यमिक शिक्षा- सहायक अध्यापक 3055, प्रवक्ता 4745, प्रधानाचार्य 1189
शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का कहना हैं कि विद्यालयी शिक्षा में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। न्यायालय में मामले लंबित होने से पदोन्नति प्रभावित हुई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां कोई विवाद नहीं है वहां तत्काल पदोन्नति की जाए।

