raibarexpress Blog उत्तराखंड ढाई साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ, शहीदों की सूची से बाहर वनकर्मी..
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ढाई साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ, शहीदों की सूची से बाहर वनकर्मी..

ढाई साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ, शहीदों की सूची से बाहर वनकर्मी..

 

 

उत्तराखंड: वन शहीद दिवस पर देशभर में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले वनकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। उत्तराखंड में भी शहीद स्मारक पर वनकर्मियों को याद किया गया और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। लेकिन इसी मौके पर राजाजी टाइगर रिजर्व में जनवरी 2024 में हुए हादसे की याद भी ताजा हो गई, जिसमें पांच वनकर्मियों समेत एक निजी कंपनी के कर्मचारी की मौत हुई थी। हादसे को करीब ढाई साल बीत चुके हैं, लेकिन मृत वनकर्मियों के नाम अभी तक वन शहीदों की सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं। वहीं, दुर्घटना के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। यही वजह है कि इस मामले को लेकर विभाग के भीतर और मृतकों के परिजनों के बीच सवाल बने हुए हैं।

वाहन ट्रायल के दौरान हुआ था हादसा..

जनवरी 2024 की शुरुआत में राजाजी टाइगर रिजर्व में वाहन के ट्रायल के दौरान गंभीर दुर्घटना हुई थी। हादसे में वन विभाग से जुड़े पांच कर्मचारियों की जान चली गई, जबकि एक निजी कंपनी के कर्मचारी की भी मौत हुई थी। घटना के बाद दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी रामास्वामी से भी जांच कराई गई। हालांकि, जांच रिपोर्ट को लेकर विभागीय स्तर पर कई सवाल उठते रहे और इसे पूरी तरह निर्णायक नहीं माना गया। इसके बाद विभागीय मंत्री की ओर से मामले में आगे भी जांच कराए जाने की बात कही गई थी। लेकिन सितंबर 2026 तक स्थिति यह है कि हादसे के लिए जिम्मेदारी तय किए जाने और दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। हादसे के समय राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक की जिम्मेदारी साकेत बडोला के पास थी। बाद में उन्हें कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की जिम्मेदारी दी गई। वहीं, तत्कालीन PCCF Wildlife और HoFF सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में हादसे के बाद विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करने को लेकर उठे सवाल अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। खास बात यह है कि घटना में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के मामले में भी अब तक वन शहीद के तौर पर दर्ज किए जाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।

शहीद स्मारक की पट्टिका में 54 नाम, लेकिन ये कर्मचारी नहीं

वन शहीद दिवस के मौके पर उत्तराखंड के शहीद स्मारक में लगी पट्टिका पर इस समय 54 वन शहीदों के नाम दर्ज हैं। इनमें चार वनकर्मियों के नाम वर्ष 2026 में उनके योगदान के आधार पर जोड़े गए हैं। हालांकि राजाजी टाइगर रिजर्व में वाहन ट्रायल के दौरान जान गंवाने वाले वनकर्मियों को अभी इस सूची में जगह नहीं मिली है। इससे यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने के बावजूद इन कर्मचारियों को शहीदों की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया आखिर क्यों लंबित है।

परिजनों को कब मिलेगा लाभ?

इस पूरे मामले का एक अहम पहलू मृत वनकर्मियों के परिवारों से भी जुड़ा है। हादसे के बाद परिजनों को मिलने वाले सरकारी लाभ और अन्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद अब तक इस मामले में स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है। वन विभाग के भीतर भी यह सवाल चर्चा में है कि यदि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों को वन शहीद की श्रेणी में शामिल किया जाना है तो इसकी प्रक्रिया कब पूरी होगी और उनके परिवारों को संबंधित लाभ कब मिलेंगे। इस मामले में प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में हादसे के ढाई साल बाद भी जांच, जिम्मेदारी और मृतक कर्मचारियों को वन शहीद का दर्जा देने से जुड़े सवालों का जवाब सामने आना बाकी है।वन शहीद दिवस पर जब विभाग अपने शहीद साथियों को श्रद्धांजलि दे रहा है, तब राजाजी टाइगर रिजर्व हादसे में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के नाम स्मारक की पट्टिका से बाहर होना पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा में ले आया है।

 

 

 

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