May 23, 2026
उत्तराखंड

आईआईटी रुड़की और कैथियन एनर्जी के बीच बड़ा समझौता, बैटरी तकनीक का हुआ हस्तांतरण..

आईआईटी रुड़की और कैथियन एनर्जी के बीच बड़ा समझौता, बैटरी तकनीक का हुआ हस्तांतरण..

 

उत्तराखंड: देश में उन्नत ऊर्जा भंडारण तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए Indian Institute of Technology Roorkee और Cathion Energy Private Limited के बीच दो महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता उन्नत लिथियम-आयन बैटरी तकनीकों के विकास और व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। समझौते के तहत जिन तकनीकों का हस्तांतरण किया गया है, उनमें रिचार्जेबल लिथियम-आयन बैटरियों के लिए उच्च शक्ति और उच्च ऊर्जा अनुप्रयोगों हेतु विकसित नवीन इलेक्ट्रोड कॉम्पोजिट तकनीक तथा उच्च-प्रदर्शन कॉम्पोजिट इलेक्ट्रोड प्रौद्योगिकी शामिल हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य बैटरियों की कार्यक्षमता, ऊर्जा घनत्व, चार्जिंग क्षमता और समग्र प्रदर्शन को बेहतर बनाना है।

आईआईटी रुड़की के निदेशक कमल किशोर पंत ने कहा कि संस्थान प्रभावशाली अनुसंधान और उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन अत्याधुनिक बैटरी तकनीकों का हस्तांतरण इस बात का उदाहरण है कि संस्थान उभरते और रणनीतिक क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इन प्रौद्योगिकियों के प्रमुख आविष्कारक अंजन सिल ने कहा कि यह हस्तांतरण प्रयोगशाला आधारित शोध को वास्तविक औद्योगिक समाधान में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य ऐसी उन्नत इलेक्ट्रोड सामग्रियों का विकास करना रहा है, जो भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को अधिक कुशल और विश्वसनीय तरीके से पूरा कर सकें।

दोनों तकनीकों के आगे के विकास और व्यावसायीकरण की जिम्मेदारी अब कैथियन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी गई है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरी राज ने कहा कि इन नवाचारों में बैटरी प्रदर्शन को बेहतर बनाने की बड़ी क्षमता है, जो तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऊर्जा भंडारण क्षेत्र को नई दिशा दे सकती है। आईआईटी रुड़की के प्रायोजित अनुसंधान एवं औद्योगिक परामर्श (एसआरआईसी) के अधिष्ठाता विवेक के मलिक ने कहा कि तकनीकी हस्तांतरण संस्थान के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा है। ऐसे सहयोग अत्याधुनिक अनुसंधान को व्यावहारिक और औद्योगिक समाधान में बदलने के साथ-साथ राष्ट्रीय तकनीकी विकास को भी गति देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये नई तकनीकें इलेक्ट्रिक वाहनों, पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों को अधिक कुशल और टिकाऊ बनाने में मदद करेंगी। इससे भारत में स्वदेशी ऊर्जा भंडारण तकनीक को मजबूती मिलने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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