6,940 करोड़ की परियोजनाओं पर सीएम की नजर, अधिकारियों को हर महीने समीक्षा के निर्देश..
उत्तराखंड: वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न स्तरों पर तेजी से कार्य कर रही हैं। इसी दिशा में उत्तराखंड सरकार भी आधारभूत ढांचे और विकास परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर विशेष ध्यान दे रही है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रगति पोर्टल के माध्यम से राज्य की प्रमुख अवसंरचना एवं विकास परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में परिवहन, ऊर्जा, लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग, सीमा सड़क संगठन और अन्य विभागों से जुड़ी लगभग 6,940 करोड़ रुपये की लागत वाली 12 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया। मुख्यमंत्री ने परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, लंबित कार्यों और सामने आ रही चुनौतियों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।
सीएम ने कहा कि विकास परियोजनाओं की नियमित और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री स्तर पर प्रत्येक माह समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, जबकि मुख्य सचिव स्तर पर हर दस दिन में प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब पाया जाएगा, वहां संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और आवश्यकतानुसार नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। बैठक के दौरान सीएम ने विशेष रूप से उन परियोजनाओं पर फोकस किया जिनका लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसी सभी परियोजनाओं को 15 अक्टूबर 2026 तक हर हाल में पूर्ण किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता केवल नई परियोजनाएं शुरू करना नहीं, बल्कि चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा कर जनता को उनका लाभ उपलब्ध कराना भी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण, वन भूमि हस्तांतरण, पर्यावरणीय स्वीकृति, मुआवजा भुगतान अथवा अन्य प्रशासनिक कारणों से कार्य प्रभावित हो रहा है, वहां संबंधित विभाग आपसी समन्वय बनाकर त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल को केवल रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि एक प्रभावी निगरानी तंत्र के रूप में उपयोग किया जाए, जिससे हर परियोजना की वास्तविक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। बैठक में जिन प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा की गई उनमें रामनगर आईएसबीटी, रानीखेत बस टर्मिनल, ताड़ीखेत डिपो एवं कार्यशाला, बनबसा और रुद्रप्रयाग विद्युत उपकेंद्र, चारधाम सड़क परियोजना, अस्कोट-लिपुलेख मार्ग, माणा पास सड़क परियोजना तथा हरिद्वार और काशीपुर क्षेत्र की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं शामिल रहीं। सीएम ने इन सभी परियोजनाओं को राज्य के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इनके समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया।
सीएम ने कहा कि चारधाम यात्रा से जुड़ी सड़क परियोजनाएं, सीमांत क्षेत्रों में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मार्ग, विद्युत अवसंरचना और परिवहन सुविधाओं का विस्तार राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास की रीढ़ हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से न केवल लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने जिलाधिकारियों को भी निर्देश दिए कि जिला स्तर पर लंबित मामलों की व्यक्तिगत निगरानी करें और भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति तथा मुआवजा वितरण से जुड़े मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाओं में देरी का सीधा असर जनहित और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है, इसलिए सभी विभाग जवाबदेही के साथ कार्य करें।
बैठक के अंत में सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, उनके लिए अलग से कार्ययोजना तैयार की जाए और नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से परिणाम सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के समग्र विकास और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में ये परियोजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और इनके समय पर पूरा होने से राज्य की विकास गति को नई मजबूती मिलेगी।


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