गुरुकुल कांगड़ी के छात्रों ने विकसित किया स्मार्ट क्वाड प्लेन, सेना के लिए बन सकता है मददगार..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के छात्रों ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के विद्यार्थियों ने एक अत्याधुनिक क्वाड हाइब्रिड आरसी प्लेन विकसित किया है, जो न केवल चार किलोग्राम तक का भार लेकर उड़ान भर सकता है, बल्कि कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपनी स्थिरता बनाए रखने में सक्षम है। इस नवाचार को रक्षा, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन राहत सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी संभावित तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है। छात्रों द्वारा विकसित यह विशेष विमान आधुनिक स्वचालित तकनीक से लैस है और इसका सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक दुर्गम क्षेत्रों में दवाइयां, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
इस परियोजना को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की टीम ने विकसित किया है। छात्र सुब्रत मंडल, राहुल कठोर, अभिजीत हर्ष, तरुष, हर्ष राज, सूरज कुमार और मोहम्मद उमेर ने विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विपुल शर्मा और वैज्ञानिक डॉ. अतुल वार्ष्णेय के मार्गदर्शन में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आकार दिया। छात्रों ने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर वे पिछले लगभग तीन वर्षों से लगातार कार्य कर रहे थे। डिजाइन तैयार करने से लेकर उपयुक्त मोटर, बैटरी, धातु और अन्य तकनीकी उपकरणों के चयन तक हर चरण पर विशेष ध्यान दिया गया। टीम ने खास तौर पर विमान की बैटरी क्षमता, उड़ान स्थिरता और भार वहन क्षमता को बेहतर बनाने पर फोकस किया।
तकनीकी रूप से यह क्वाड प्लेन काफी शक्तिशाली माना जा रहा है। इसका कुल वजन लगभग 2.7 किलोग्राम है, जबकि इसमें लगी मोटरें 7 से 8 किलोग्राम तक का थ्रस्ट उत्पन्न करने में सक्षम हैं। यही वजह है कि यह विमान लगभग चार किलोग्राम तक का अतिरिक्त भार आसानी से लेकर उड़ान भर सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार इतनी क्षमता वाला हल्का और स्वचालित विमान पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है। विशेष रूप से आपदा की स्थिति में जहां सड़क संपर्क बाधित हो जाता है, वहां ऐसी तकनीक राहत कार्यों को नई गति दे सकती है। छात्रों और शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में भारतीय सेना के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों तक दवाइयां, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के लिए इस प्रकार के स्वचालित विमानों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं, भूस्खलन या बाढ़ जैसी परिस्थितियों में भी यह तकनीक राहत एवं बचाव कार्यों को आसान बना सकती है। जहां पारंपरिक साधनों से पहुंचना मुश्किल होता है, वहां ऐसे विमान कम समय में जरूरी सामग्री पहुंचा सकते हैं।
इस क्वाड प्लेन की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी ऑटोमैटिक नियंत्रण प्रणाली शामिल है। विमान को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह प्रतिकूल मौसम और तेज हवाओं जैसी परिस्थितियों में भी स्वयं को संतुलित बनाए रख सके। इसके साथ ही यह सीधे ऊपर की दिशा में उड़ान भरने की क्षमता रखता है, जिससे इसे सीमित स्थानों से भी संचालित किया जा सकता है। आधुनिक नियंत्रण प्रणाली के कारण इसकी उड़ान अधिक सुरक्षित और प्रभावी मानी जा रही है।
अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विपुल शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्र लगातार शोध और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है बल्कि भविष्य में देश की रक्षा और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को भी नई तकनीकी दिशा दे सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस सफल परीक्षण पर छात्रों और मार्गदर्शक शिक्षकों को बधाई दी है।
साथ ही उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में इस तकनीक को और विकसित कर व्यावहारिक उपयोग के लिए तैयार किया जा सकेगा। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों द्वारा विकसित यह क्वाड हाइब्रिड प्लेन देश में स्वदेशी तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सीमित संसाधनों के बीच विकसित यह परियोजना दर्शाती है कि युवा शोधकर्ता नई चुनौतियों का समाधान खोजने में सक्षम हैं। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के छात्रों की यह उपलब्धि न केवल संस्थान बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय बन गई है। भविष्य में यह तकनीक रक्षा, राहत और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।


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