February 10, 2026
उत्तराखंड

उत्तराखंड शिक्षा विभाग में 2026 में 6000 रिक्त पदों पर भर्ती, शिक्षक और स्टाफ होंगे शामिल..

उत्तराखंड शिक्षा विभाग में 2026 में 6000 रिक्त पदों पर भर्ती, शिक्षक और स्टाफ होंगे शामिल..

 

 

 

उत्तराखंड: साल 2026 में उत्तराखंड की शिक्षा प्रणाली में सुधार और आधुनिकता लाने के लिए शिक्षा विभाग ने नई शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) के तहत एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, स्कूलों में सकल नामांकन अनुपात सुधारना और स्कूलों के प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक को देशभर में उच्च रैंक दिलाना है। नई कार्ययोजना में शैक्षणिक ढांचे, मानव संसाधन, डिजिटल शिक्षा और पाठ्यक्रम में बड़े पैमाने पर सुधार शामिल हैं। इसके तहत प्रदेश के सभी विद्यालयों को विद्या समीक्षा केन्द्र से जोड़ा जाएगा, जिससे प्रत्येक स्कूल का शैक्षणिक, प्रशासनिक और आधारभूत ढांचा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। यह व्यवस्था नीतिगत निर्णयों को समयबद्ध और प्रभावी रूप से लागू करने में मदद करेगी।

शिक्षक भर्ती में बड़े पैमाने पर सुधार..

2026 में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के विभिन्न वर्गों में 6000 से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। इसमें प्राथमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक (बेसिक) के 1670 रिक्त पदों और सहायक अध्यापक के पद शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग में प्रवक्ता के 808 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जबकि सहायक अध्यापक एलटी के 1000 से अधिक पदों को नए वर्ष में भरा जाएगा। इसके साथ ही समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत 324 लेखाकार सह सपोर्टिंग स्टाफ, 161 विशेष शिक्षक, 95 कैरियर काउंसलर और विद्या समीक्षा केन्द्र के 18 पदों पर नियुक्तियां होंगी। विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के 2364 रिक्त पदों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भरा जाएगा। इस बड़े स्तर की भर्ती से स्कूलों में शिक्षकों और अन्य स्टाफ की कमी दूर होगी और शिक्षण प्रणाली को मजबूती मिलेगी।

एनईपी-2020 और पाठ्यक्रम में बदलाव..

एससीईआरटी द्वारा तैयार नई राज्य पाठ्यचर्या लागू की जाएगी, जिसमें स्कूल शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 240-दिवसीय शैक्षणिक सत्र निर्धारित किया गया है, जिसमें 200 शिक्षण दिवस, 20 परीक्षा और मूल्यांकन दिवस तथा 10-10 दिन बस्ता रहित और अन्य गतिविधियों के लिए निर्धारित हैं। कक्षा 11 से विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार विषय चुन सकेंगे, जिससे शिक्षा अधिक लचीली और छात्र-केंद्रित होगी।

शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षा..

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों के ढांचे का पुनर्गठन किया जाएगा। यूजीसी मानकों के अनुरूप सेवा नियमावली तैयार कर पृथक शिक्षक संवर्ग का गठन किया जाएगा, जिससे शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देते हुए प्रदेश के 840 सरकारी विद्यालयों को वर्चुअल क्लास नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। हाइब्रिड मोड में वर्चुअल और स्मार्ट क्लास के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी, जिससे सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी। इस पहल से न केवल शिक्षा के स्तर में सुधार होगा, बल्कि प्रदेश में स्कूलों का समग्र विकास और विद्यार्थियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।

 

 

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