February 10, 2026
उत्तराखंड

धामी सरकार की योजनाओं से बदले हालात, किसान-युवा-पर्यटन को मिल रहा संबल..

धामी सरकार की योजनाओं से बदले हालात, किसान-युवा-पर्यटन को मिल रहा संबल..

 

 

 

उत्तराखंड: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में कृषि, पशुपालन, पर्यटन और उद्योग विभागों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की गहन समीक्षा की। बैठक के दौरान सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को इस तरह लागू किया जाए, जिससे अधिक से अधिक लोगों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जा सके। सीएम ने कहा कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के माध्यम से आम लोगों तक योजनाओं की पूरी जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि पात्र व्यक्ति इनका पूरा लाभ उठा सकें। उन्होंने युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने और उन्हें स्वरोजगार के लिए अधिकतम अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि योजनाओं का लाभ समय पर और पूर्ण रूप से मिले तथा आवंटित बजट का वास्तविक और प्रभावी आउटकम सामने आए। सीएम ने उच्च स्तरीय बैठकों की पारदर्शिता और निगरानी को लेकर निर्देश दिए कि सभी बैठकों के कार्यवृत्त अनिवार्य रूप से उन्नति पोर्टल पर अपलोड किए जाएं।

सेब, कीवी और शहद उत्पादन पर फोकस..

बैठक में सेब की अतिसघन बागवानी योजना की समीक्षा करते हुए सीएम ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना को प्रभावी ढंग से संचालित कर निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। किसानों को अधिक से अधिक प्रोत्साहन दिया जाए और उनसे संबंधित देयकों का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए राज्य में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए। साथ ही सीएम ने कहा कि उत्तराखंड में शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें देखते हुए हनी मिशन के तहत मौन पालन को और सशक्त किया जाए। राज्य में उत्पादित शहद का ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। बागवानी और मौन पालन के क्षेत्र में जिन राज्यों ने बेहतर कार्य किया है, उनके अध्ययन के लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीमें उन राज्यों में भेजी जाएं, ताकि सफल मॉडलों को उत्तराखंड में अपनाया जा सके।

29 उत्पादों को जीआई टैग, 25 नए उत्पादों की तैयारी..

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि प्रदेश के 29 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, जिनमें से 18 उत्पाद कृषि एवं कृषि कल्याण से जुड़े हैं। इसके साथ ही इस वर्ष 25 नए उत्पादों को जीआई टैग के लिए चिन्हित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार द्वारा 134 करोड़ रुपये की लागत से लागू स्टेट मिलेट पॉलिसी के तहत मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी और चीना को शामिल किया गया है। इस नीति के पहले चरण में 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 24 विकासखंडों और दूसरे चरण में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 44 विकासखंडों का चयन किया गया है। पहले चरण में 5 हजार से अधिक गांवों को आच्छादित करते हुए करीब डेढ़ लाख किसानों को लाभ पहुंचाया गया है। मिलेट फसलों की खरीद-बिक्री के लिए 216 क्रय केंद्र खोले गए हैं और सहकारिता विभाग के अंतर्गत 20 करोड़ रुपये का रिवाल्विंग फंड भी बनाया गया है। इस वित्तीय वर्ष में 5 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 5,386 मीट्रिक टन मिलेट फसलों का क्रय किया जा चुका है।

स्वरोजगार और पर्यटन योजनाओं में मजबूत प्रगति..

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के तहत पिछले चार वर्षों में 32 हजार के लक्ष्य के सापेक्ष 33,620 लाभार्थियों को 202.72 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है। आगामी वर्ष में 9 हजार नए लाभार्थियों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। पर्यटन विभाग की दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के अंतर्गत चार वर्षों में 780 होम स्टे स्थापित किए गए हैं, जिसके लिए 188.58 करोड़ रुपये का वित्त पोषण किया गया। वहीं वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के तहत चार वर्षों में एक हजार से अधिक लोगों को लाभान्वित करते हुए 105 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। सरकार का लक्ष्य कृषि, पर्यटन, उद्योग और स्वरोजगार को आपस में जोड़कर उत्तराखंड को आत्मनिर्भर और रोजगारपरक राज्य के रूप में विकसित करना है।

 

 

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