February 9, 2026
उत्तराखंड

आज मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं के लिए खुले आदिबद्री मंदिर के कपाट..

आज मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं के लिए खुले आदिबद्री मंदिर के कपाट..

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में मकर संक्रांति का पर्व पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध आदिबद्री मंदिर के कपाट बुधवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त में श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही मंदिर परिसर “जय बद्री विशाल” के जयघोष से गूंज उठा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान नारायण के दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर के कपाट खुलने के अवसर पर मुख्य पुजारी चक्रधर प्रसाद थपलियाल ने विधिवत अभिषेक पूजा संपन्न कराई। इसके बाद भगवान नारायण को स्नान, भोग अर्पित किया गया और पंच ज्वाला आरती के साथ दर्शन प्रक्रिया शुरू की गई। इसी के साथ आदिबद्री धाम में सात दिवसीय महाभिषेक समारोह का भी शुभारंभ कर दिया गया है।

मकर संक्रांति के विशेष अवसर पर आदिबद्री मंदिर को लगभग दो क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है, जिससे मंदिर परिसर अलौकिक छटा बिखेर रहा है। आदिबद्री धाम मंदिर समिति के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद बहुगुणा ने कहा कि पौष माह में एक माह के लिए बंद रहने वाले मंदिर के कपाट मकर संक्रांति के दिन सुबह 4 बजे ब्रह्म मुहूर्त में श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। उन्होंने कहा कि कपाट खुलने के बाद से लगातार श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। इस अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी आयोजन किया गया है। महिला मंगल दलों और स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इसके साथ ही श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसका वाचन 20 जनवरी तक किया जाएगा। समिति अध्यक्ष ने कहा कि कपाट खुलने के बाद तीन दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

आदिबद्री धाम को पंचबद्री में प्रथम धाम माना जाता है और यह भगवान विष्णु के सबसे प्राचीन निवास स्थलों में से एक है। मान्यता है कि बद्री नाथ धाम के दर्शन से पूर्व आदिबद्री के दर्शन करना आवश्यक होता है, तभी बद्री नाथ यात्रा पूर्ण मानी जाती है। आदिबद्री मंदिर भगवान नारायण को समर्पित है, जिन्हें भगवान विष्णु का प्रथम स्वरूप माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से आदिबद्री एक समय में 16 मंदिरों का समूह हुआ करता था। वर्तमान में परिसर में 14 मंदिर विद्यमान हैं। इनमें भगवान विष्णु के मुख्य मंदिर के साथ गरुड़ भगवान, अन्नपूर्णा देवी, कुबेर भगवान, सत्यनारायण, लक्ष्मी नारायण, गणेश भगवान, हनुमान जी, गौरी शंकर, महिषासुर मर्दिनी, शिवालय, जानकी जी और सूर्य भगवान सहित अन्य देवालय शामिल हैं। ये मंदिर आदिबद्री को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। मकर संक्रांति के अवसर पर आदिबद्री धाम में उमड़े श्रद्धालुओं ने प्रदेश की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।

 

 

 

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