June 5, 2026
उत्तराखंड

चीरबासा हेलीपैड के पास हादसा, पहाड़ी से गिरे पत्थरों ने ली घोड़ा संचालक की जान..

चीरबासा हेलीपैड के पास हादसा, पहाड़ी से गिरे पत्थरों ने ली घोड़ा संचालक की जान..

 

उत्तराखंड: केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान शुक्रवार को एक दुखद हादसे ने सभी को झकझोर दिया। यात्रा मार्ग पर चीरबासा हेलीपैड के समीप ऊंची पहाड़ी से अचानक पत्थर और मलबा गिरने से एक स्थानीय घोड़ा संचालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक तीर्थयात्री गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद कुछ समय के लिए क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और यात्रा मार्ग पर मौजूद श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई। जानकारी के अनुसार दोपहर के समय चीरबासा क्षेत्र में अचानक पहाड़ी से पत्थर खिसकने लगे। देखते ही देखते बड़े-बड़े पत्थर नीचे की ओर गिरने लगे और वहां मौजूद दो लोग इसकी चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना इतनी अचानक हुई कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

राहत और बचाव टीमों ने तुरंत संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, आपदा प्रबंधन विभाग, डीडीआरएफ, यात्रा प्रबंधन से जुड़ी संस्थाओं और स्थानीय प्रशासन की टीमें तत्काल मौके के लिए रवाना हुईं। संयुक्त बचाव दल ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया और घायल व्यक्ति को सुरक्षित निकालकर उपचार के लिए गौरीकुंड स्थित चिकित्सा केंद्र भेजा। चिकित्सकों के अनुसार घायल यात्री को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया है और उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। घायल व्यक्ति राजस्थान का निवासी बताया जा रहा है, जो केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए यात्रा पर आया था। हादसे में जान गंवाने वाले युवक की पहचान 23 वर्षीय देवेश सिंह के रूप में हुई है, जो रुद्रप्रयाग जिले के बड़ासू गांव का निवासी था। देवेश केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़ा संचालक के रूप में कार्य करता था और तीर्थयात्रियों को यात्रा मार्ग पर सेवाएं उपलब्ध कराता था। बताया जा रहा है कि पत्थरों की चपेट में आने से उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलने के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई। प्रशासन द्वारा आवश्यक कानूनी और राजस्व संबंधी कार्रवाई की जा रही है।

पिछले कई दिनों से केदारनाथ यात्रा क्षेत्र में मौसम लगातार खराब बना हुआ है। रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार नमी और वर्षा के कारण पहाड़ियों की ऊपरी परतें कमजोर हो जाती हैं, जिससे चट्टानों के खिसकने और मलबा गिरने की आशंका बढ़ जाती है। यात्रा मार्ग के कई हिस्से ऐसे हैं जिन्हें संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है और जहां प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है। इसके बावजूद प्राकृतिक परिस्थितियों के चलते अचानक इस तरह की घटनाएं सामने आ जाती हैं। हादसे के बाद प्रशासन ने यात्रा मार्ग के जोखिम वाले क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित विभागों को संवेदनशील स्थलों पर लगातार नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कहा गया है। यात्रा मार्ग पर तैनात सुरक्षा कर्मियों और आपदा प्रबंधन टीमों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान पूरी सावधानी बरतें और संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न रुकें। मौसम खराब होने की स्थिति में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

 

 

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