सेना भर्ती को लेकर सतपाल महाराज की बड़ी मांग, रक्षा मंत्री से की विशेष मुलाकात..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने और सैन्य सेवाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने को लेकर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने केंद्र सरकार के समक्ष महत्वपूर्ण मांग उठाई है। नई दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने केंद्रीय रक्षा मंत्री से मुलाकात कर राज्य में अधिक संख्या में सेना भर्ती रैलियां आयोजित कराने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि उत्तराखंड का युवावर्ग शारीरिक रूप से सक्षम, अनुशासित और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित है, इसलिए उन्हें सैन्य सेवाओं में अधिक अवसर मिलना चाहिए। रविवार को राजधानी दिल्ली में हुई इस मुलाकात के दौरान सतपाल महाराज ने उत्तराखंड की सैन्य परंपरा और युवाओं की देशभक्ति का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्रालय से राज्य के लिए विशेष भर्ती कार्यक्रमों पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड लंबे समय से देश को बड़ी संख्या में सैनिक, अधिकारी और वीर योद्धा देता रहा है। प्रदेश के लगभग हर परिवार का किसी न किसी रूप में सेना से जुड़ाव रहा है, जिसके कारण यहां सैन्य सेवाओं के प्रति विशेष आकर्षण और सम्मान देखने को मिलता है।
महाराज ने रक्षा मंत्री को बताया कि उत्तराखंड में साक्षरता दर लगातार बढ़ी है और आज प्रदेश के अधिकांश युवा बेहतर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही पर्वतीय जीवनशैली के कारण यहां के युवाओं की शारीरिक क्षमता और सहनशक्ति भी अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर मानी जाती है। ऐसे में यदि राज्य में नियमित रूप से भर्ती रैलियां आयोजित की जाएं तो बड़ी संख्या में योग्य युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने रक्षा मंत्रालय से केवल थल सेना ही नहीं बल्कि भारतीय नौसेना, वायुसेना और तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) में भी उत्तराखंड के युवाओं के लिए अधिक भर्ती अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। उनका मानना है कि प्रदेश के युवाओं में सभी रक्षा सेवाओं में योगदान देने की क्षमता है और उन्हें पर्याप्त अवसर दिए जाने चाहिए।
मुलाकात के दौरान सतपाल महाराज ने अपने पूर्व संसदीय अनुभवों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जब वे संसद की रक्षा मामलों से संबंधित स्थायी समिति से जुड़े थे, तब उत्तराखंड में कई भर्ती रैलियों के आयोजन के लिए प्रयास किए गए थे, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को लाभ मिला था। उनका कहना है कि वर्तमान समय में भी इसी प्रकार के प्रयासों की आवश्यकता है, ताकि राज्य के युवाओं को रोजगार और राष्ट्र सेवा दोनों का अवसर मिल सके। उत्तराखंड को लंबे समय से ‘वीर भूमि’ के रूप में जाना जाता है। राज्य के हजारों युवा हर वर्ष सेना और अर्धसैनिक बलों में भर्ती होने का सपना लेकर तैयारी करते हैं। हालांकि भर्ती प्रक्रियाओं में बदलाव और सीमित अवसरों के कारण कई युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल पाते। ऐसे में राज्य में अधिक भर्ती रैलियों की मांग को युवाओं के हित से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक जानकारों का मानना है कि यदि उत्तराखंड में सेना, नौसेना, वायुसेना और कोस्ट गार्ड की भर्ती प्रक्रियाओं का दायरा बढ़ता है तो इससे न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि प्रदेश की सैन्य परंपरा को भी नई मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं को अपने राज्य में ही भर्ती संबंधी अवसर उपलब्ध होने से आर्थिक और सामाजिक लाभ भी प्राप्त होंगे। फिलहाल रक्षा मंत्रालय की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि राज्य सरकार और केंद्र के बीच इस विषय पर आगे भी संवाद जारी रहेगा। उत्तराखंड के युवाओं को उम्मीद है कि आने वाले समय में रक्षा सेवाओं में भर्ती के अवसर बढ़ेंगे और बड़ी संख्या में युवा देश सेवा का सपना साकार कर सकेंगे।

