June 4, 2026
उत्तराखंड

सहकारी संस्थाओं में सौर ऊर्जा को बढ़ावा, पीसीयू को मिली नोडल एजेंसी की जिम्मेदारी..

सहकारी संस्थाओं में सौर ऊर्जा को बढ़ावा, पीसीयू को मिली नोडल एजेंसी की जिम्मेदारी..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में सहकारी संस्थाओं को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। उत्तराखंड प्रादेशिक सहकारी संघ (पीसीयू) को राज्य की सहकारी संस्थाओं में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है। इसके तहत संघ विभिन्न सहकारी संस्थानों में सोलर रूफटॉप परियोजनाओं की स्थापना और संचालन की जिम्मेदारी संभालेगा। यह निर्णय हाल ही में आयोजित प्रबंध समिति की बैठक में लिया गया, जिसमें सहकारी क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में यह भी तय किया गया कि पीसीयू परियोजना प्रबंधन सलाहकार (पीएमसी) की भूमिका भी निभाएगा और सहकारी संस्थाओं में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक समन्वय स्थापित करेगा।

योजना के तहत राज्य की शीर्ष सहकारी संस्थाओं, जिला सहकारी बैंकों और अन्य संबद्ध संस्थानों में सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए संघ संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर परियोजनाओं को धरातल पर उतारेगा। भविष्य में अन्य सहकारी समितियों को भी इस पहल से जोड़ा जाएगा, जिससे ऊर्जा खर्च में कमी आने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारी संस्थाओं में सौर ऊर्जा के उपयोग से बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी आएगी और संस्थाएं दीर्घकालिक रूप से आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकेंगी। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलेगी।

बैठक में संघ की आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने और नए व्यवसायिक अवसर विकसित करने पर भी चर्चा हुई। सदस्यों ने सहकारी संस्थाओं की आय बढ़ाने के लिए नवाचार आधारित योजनाओं को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उद्देश्य यह है कि सहकारी क्षेत्र केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित न रहकर नए क्षेत्रों में भी अपनी भागीदारी बढ़ाए। सहकारी संस्थाओं को संघ से जोड़ने और सदस्यता बढ़ाने के उद्देश्य से एक अहम निर्णय भी लिया गया। सदस्य समितियों के वार्षिक सदस्यता शुल्क में बड़ी कटौती करते हुए इसे 5,000 रुपये से घटाकर 2,000 रुपये कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इससे अधिक संख्या में सहकारी संस्थाएं संघ से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित होंगी।

प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर रहेगा जोर..

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सहकारिता क्षेत्र में व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की भी योजना बनाई गई है। इसके लिए पूरे वर्ष का विस्तृत प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारियों, कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ाना तथा उन्हें बदलती व्यवस्थाओं और तकनीकी नवाचारों के अनुरूप तैयार करना होगा। सहकारिता क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सदस्यता विस्तार जैसे कदमों से प्रदेश का सहकारी क्षेत्र अधिक मजबूत, आधुनिक और आत्मनिर्भर बन सकेगा।

 

 

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