February 10, 2026
उत्तराखंड

केंद्र से मंजूरी के बाद तेज होगी हल्द्वानी-अल्मोड़ा ग्रीन फील्ड हाईवे की तैयारी..

केंद्र से मंजूरी के बाद तेज होगी हल्द्वानी-अल्मोड़ा ग्रीन फील्ड हाईवे की तैयारी..

 

उत्तराखंड: हल्द्वानी से अल्मोड़ा तक प्रस्तावित ग्रीन फील्ड हाईवे के निर्माण को केंद्र सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद पहाड़ी इलाकों में आवागमन न केवल आसान होगा, बल्कि समय की भी बड़ी बचत होगी। हाईवे के निर्माण के बाद हल्द्वानी से अल्मोड़ा का सफर लगभग दो घंटे में पूरा किया जा सकेगा, जो वर्तमान में चार से पांच घंटे तक का हो जाता है। फिलहाल कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी से अल्मोड़ा तक जाने वाला मार्ग अत्यधिक दबाव झेल रहा है। बढ़ती आबादी, पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या और संकरे पहाड़ी रास्तों के चलते आए दिन लंबा जाम लगना आम बात हो गई है। भीमताल और कैंची धाम क्षेत्र में जाम की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर रहती है, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ यात्रियों और पर्यटकों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अब ग्रीन फील्ड हाईवे की योजना को गति दी गई है।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की राज्यवार समीक्षा बैठक में इस परियोजना को हरी झंडी दी गई। बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में उत्तराखंड की सड़क परियोजनाओं पर चर्चा हुई, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा भी मौजूद रहे। इसी बैठक के दौरान हल्द्वानी से अल्मोड़ा तक ग्रीन फील्ड हाईवे के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। प्रस्तावित योजना के तहत हल्द्वानी से भवाली तक सड़क को डबल लेन के रूप में विकसित किया जाएगा। जाम की समस्या से जूझ रहे गुलाब घाटी क्षेत्र में डबल लेन के साथ एलिवेटेड पुल का भी प्रस्ताव है, जिससे यातायात निर्बाध रूप से संचालित हो सके। भीमताल के टाप से नई सड़क निकाले जाने की योजना है, जो आगे रामगढ़, मुक्तेश्वर होते हुए मौना, लाट और सरसों तक पहुंचेगी।

इसके साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में दूरी और समय को कम करने के उद्देश्य से कई स्थानों पर सुरंगों (टनल) के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा गया है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद जल्द ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। डीपीआर के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ड्रोन सर्वे भी कराया जाएगा, ताकि भौगोलिक चुनौतियों को पहले ही चिन्हित किया जा सके और निर्माण के दौरान किसी प्रकार की अड़चन न आए। सरकार का मानना है कि यह ग्रीन फील्ड हाईवे सीमांत जिलों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके निर्माण से न केवल कुमाऊं क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि पर्यटन गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलने और व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार की भी उम्मीद जताई जा रही है।

 

 

 

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