केदारनाथ धाम में कर्मचारी आंदोलन की तैयारी, सात दिन में मांगें नहीं मानीं तो बढ़ेगा विरोध..
उत्तराखंड: बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी कर ली है। करीब 300 कर्मचारियों ने मंगलवार से केदारनाथ मंदिर परिसर में एक सप्ताह तक क्रमिक अनशन करने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि इस अवधि में मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे। कर्मचारियों के अनुसार, वे लंबे समय से बदरीनाथ और केदारनाथ धाम समेत मंदिर समिति के अधीन आने वाले अन्य मंदिरों में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। उनका आरोप है कि कई बार अधिकारियों के सामने अपनी मांगें रखने के बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।
लंबित मांगों को लेकर जताई नाराजगी
कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाना चिंता का विषय है। इसी के विरोध में उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मंगलवार से लगातार सात दिनों तक सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक क्रमिक अनशन किया जाएगा। कर्मचारियों ने साफ किया कि आंदोलन का उद्देश्य समिति प्रबंधन का ध्यान लंबित समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। यदि एक सप्ताह के भीतर समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। आंदोलन से जुड़े कर्मचारी राजेंद्र रावत, योगंबर सिंह और संदीप रावत ने कहा कि सेवा के दौरान दिवंगत हुए करीब 12 कर्मचारियों के परिवारों को अब तक आर्थिक सहायता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि मंदिर समिति में वर्षों तक सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के निधन के बाद उनके आश्रितों को सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी है। कर्मचारियों ने इस मामले में शीघ्र निर्णय लेने और प्रभावित परिवारों को राहत देने की मांग की है। कर्मचारियों ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर वे पहले भी अधिकारियों से संपर्क कर चुके हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण अब आंदोलन का फैसला लिया गया है। एक सप्ताह के क्रमिक अनशन के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मांगों का समाधान नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जा सकती है। ऐसी स्थिति में मंदिर समिति के अंतर्गत संचालित व्यवस्थाओं पर असर पड़ने की आशंका है।




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