raibarexpress Blog उत्तराखंड पलायन ने बढ़ाई शिक्षा विभाग की चिंता, पौड़ी में 32 प्राथमिक समेत 40 स्कूल बंद..
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पलायन ने बढ़ाई शिक्षा विभाग की चिंता, पौड़ी में 32 प्राथमिक समेत 40 स्कूल बंद..

पलायन ने बढ़ाई शिक्षा विभाग की चिंता, पौड़ी में 32 प्राथमिक समेत 40 स्कूल बंद..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में लगातार बढ़ रहा पलायन अब सरकारी शिक्षा व्यवस्था के सामने भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। गांवों से परिवारों के बाहर जाने और बच्चों की संख्या घटने के कारण कई सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई की व्यवस्था ही बंद करनी पड़ रही है। पौड़ी जिले में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान छात्र संख्या शून्य होने के चलते 40 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय बंद हो गए हैं। इनमें 32 प्राथमिक और आठ उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। जिले में स्कूलों की यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में घटती आबादी और सरकारी विद्यालयों में नामांकन की समस्या को उजागर करती है। जिन गांवों में कभी बच्चों की आवाजाही से विद्यालयों में रौनक रहती थी, वहां अब विद्यार्थियों के अभाव में स्कूल संचालित करना मुश्किल हो गया है।

15 विकासखंडों में बंद हुए 40 विद्यालय
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पौड़ी जिले में कुल 1,297 प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें से 32 विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र में किसी भी विद्यार्थी ने प्रवेश नहीं लिया। इसी तरह जिले के 231 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आठ ऐसे हैं, जहां छात्र संख्या शून्य दर्ज की गई। विकासखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पौड़ी, यमकेश्वर और बीरोंखाल में सबसे अधिक पांच-पांच विद्यालय बंद हुए हैं। एकेश्वर, कल्जीखाल, थलीसैंण और पाबौ में तीन-तीन विद्यालयों में ताले लगे हैं। वहीं, द्वारीखाल, कोट, पोखड़ा, दुगड्डा और जयहरीखाल में दो-दो विद्यालय बंद हुए हैं। खिर्सू, रिखणीखाल और नैनीडांडा में एक-एक विद्यालय में छात्र संख्या नहीं होने के कारण संचालन बंद करना पड़ा है।

बीरोंखाल में पांच प्राथमिक विद्यालय बंद
प्राथमिक विद्यालयों पर सबसे अधिक असर बीरोंखाल विकासखंड में देखने को मिला है, जहां पांच विद्यालय बंद हुए हैं। पौड़ी और यमकेश्वर में चार-चार प्राथमिक विद्यालयों का संचालन बंद हुआ। एकेश्वर, द्वारीखाल, कोट, कल्जीखाल, थलीसैंण, पाबौ, पोखड़ा और दुगड्डा में दो-दो प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं। खिर्सू, जयहरीखाल और नैनीडांडा में एक-एक प्राथमिक विद्यालय में ताला लगा है। उच्च प्राथमिक स्तर पर भी कई विकासखंडों में छात्र संख्या शून्य होने की स्थिति सामने आई है। एकेश्वर, यमकेश्वर, कल्जीखाल, रिखणीखाल, थलीसैंण, पाबौ, पौड़ी और जयहरीखाल में एक-एक उच्च प्राथमिक विद्यालय बंद हुआ है। शिक्षा विभाग के उपलब्ध विवरण के मुताबिक, एकेश्वर विकासखंड में प्राथमिक विद्यालय डियूल्ड और पुसोली के साथ उच्च प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल बंद हुआ है। यमकेश्वर में प्राथमिक विद्यालय पलेलगांव, पैंया, उमड़ा और नांद तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय चोपड़ा कस्याली का संचालन बंद हुआ है। द्वारीखाल में प्राथमिक विद्यालय घंडालू और खेड़ा बंद हुए हैं, जबकि बीरोंखाल में तनकिला, गाडखर्क, रतकोट, सुंदरखाल और चौंडी के प्राथमिक विद्यालयों में छात्र नहीं होने के कारण ताले लग गए हैं। कोट विकासखंड में सैंज और कंडोला के प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं।

कल्जीखाल में प्राथमिक विद्यालय बूंगा-दो और बलोद के साथ उच्च प्राथमिक विद्यालय पलाई बंद हुआ है। खिर्सू में प्राथमिक विद्यालय मुसोली और थलीसैंण में प्राथमिक विद्यालय खरकासारी, कुवाखर्क तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय कांडई का संचालन बंद करना पड़ा है। रिखणीखाल में उच्च प्राथमिक विद्यालय मेलधार, पाबौ में प्राथमिक विद्यालय कोटा और कलुण तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय कुई बंद हुए हैं। पोखड़ा में प्राथमिक विद्यालय चमनाऊ और पोखड़ा में छात्र संख्या शून्य रही। पौड़ी विकासखंड में प्राथमिक विद्यालय गजेंद्रपुर, चांदखेत, डोबल्या, थपलियालगांव और उच्च प्राथमिक विद्यालय कड़ाकोट बंद हुए हैं। इसी तरह दुगड्डा में प्राथमिक विद्यालय गढ़सिर और केष्टा, जयहरीखाल में प्राथमिक विद्यालय मोली और उच्च प्राथमिक विद्यालय रैतपुर तथा नैनीडांडा में प्राथमिक विद्यालय झुडंगू का संचालन बंद हुआ है।

पलायन से गांवों में घट रही बच्चों की संख्या
पर्वतीय क्षेत्रों से रोजगार, बेहतर शिक्षा और अन्य सुविधाओं की तलाश में परिवारों का शहरों की ओर जाना लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। इसका असर अब गांवों की शैक्षणिक व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कई दूरस्थ गांवों में परिवारों की संख्या घटने के साथ बच्चों की संख्या भी कम हो गई है। ऐसे में विद्यालयों में नए प्रवेश नहीं हो पा रहे हैं और स्कूलों का संचालन कठिन होता जा रहा है। सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की घटती संख्या के बीच शिक्षा विभाग के सामने शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने और नामांकन बढ़ाने की दोहरी चुनौती है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की उपलब्धता बच्चों की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, इसलिए विद्यालयों के बंद होने से दूरस्थ इलाकों में शिक्षा की पहुंच को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम से नामांकन बढ़ाने की उम्मीद
जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) पौड़ी अंशुल बिष्ट के अनुसार, जिले के कई गांवों में पलायन के कारण बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर बेहतर बनाने के लिए गुणवत्ता पूरक शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसके तहत खंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) और संकुल संसाधन केंद्र (सीआरसी) के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिले में कुछ नए खंड शिक्षा अधिकारियों की तैनाती से विद्यालयों में सुधार संबंधी कार्यों को गति देने में मदद मिलेगी। विभाग का प्रयास है कि सरकारी स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जाए, जिससे अभिभावकों का भरोसा बढ़े और विद्यार्थियों की संख्या में सुधार हो सके। अब देखना होगा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शुरू किए जा रहे कार्यक्रम और विभागीय प्रयास पौड़ी के ग्रामीण विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने में कितने प्रभावी साबित होते हैं।

 

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