July 24, 2026
उत्तराखंड

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने बताया अपना विकास मॉडल, गांवों से AI तक बदले उत्तराखंड की तस्वीर..

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने बताया अपना विकास मॉडल, गांवों से AI तक बदले उत्तराखंड की तस्वीर..

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने अपने कार्यकाल के पांच वर्षों को केवल संवैधानिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं माना, बल्कि इसे राज्य के विकास में सक्रिय भागीदारी के रूप में बताया है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहा कि राजभवन सिर्फ औपचारिक गतिविधियों तक सीमित न रहकर शिक्षा, तकनीक, महिला सशक्तिकरण, पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने जैसे विषयों पर प्रेरक भूमिका निभाए। राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि पदभार संभालने के बाद उन्होंने उत्तराखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को समझते हुए कुछ प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी। उनका उद्देश्य सरकार के समानांतर काम करना नहीं, बल्कि विकास कार्यों में सहयोगी और मार्गदर्शक की भूमिका निभाना रहा।राज्यपाल ने कहा कि उनके कार्यकाल में पांच प्रमुख मिशनों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया। इनमें रिवर्स पलायन, महिला सशक्तिकरण एवं बालिका शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक का विस्तार, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और स्थानीय स्तर पर रोजगार देने वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित करना शामिल रहा।

उन्होंने कहा कि पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए गांवों में रोजगार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और स्थानीय संसाधनों पर आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। जब लोगों को अपने क्षेत्र में ही आय के साधन मिलेंगे, तभी वे गांवों में रुकने या वापस लौटने के लिए प्रेरित होंगे।राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि उनके कार्यकाल की सबसे संतोषजनक उपलब्धियों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का आत्मनिर्भर बनना शामिल है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं अब केवल परिवार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत भागीदार बन रही हैं। महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी से गांवों में सामाजिक बदलाव भी देखने को मिल रहा है। बालिका शिक्षा, कौशल विकास और स्वरोजगार के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों का सकारात्मक असर सामने आया है।

उच्च शिक्षा में शोध और तकनीक को दी नई दिशा

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें राज्य की समस्याओं के समाधान के लिए शोध को बढ़ावा देना चाहिए। इसी सोच के तहत वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च जैसी पहल को आगे बढ़ाया गया। इसके साथ ही कॉलेजों की संबद्धता प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। विश्वविद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय के लिए भी तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म विकसित किए गए।राज्यपाल ने बताया कि लोक भवन (राजभवन) को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया गया। ई-ऑफिस, डिजिटल डैशबोर्ड, ई-पास सिस्टम और आधुनिक लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं। उन्होंने कहा कि देहरादून और नैनीताल स्थित राजभवनों को डिजिटल माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाने के लिए वर्चुअल टूर की सुविधा भी शुरू की गई। इससे लोगों को राजभवन की गतिविधियों और व्यवस्थाओं की जानकारी आसानी से मिल रही है।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि एआई का इस्तेमाल शिक्षा, प्रशासन, स्वास्थ्य और आम लोगों तक सेवाएं पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बताया कि आम जनता तक जानकारी पहुंचाने के लिए एआई आधारित चैटबॉट जैसी पहल शुरू की गईं। महिलाओं के लिए कानूनी अधिकार, स्वास्थ्य, करियर और वित्तीय जानकारी उपलब्ध कराने वाली तकनीक आधारित सुविधाओं पर भी काम किया गया।राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान प्रदेश के सभी जिलों का दौरा किया और स्थानीय समस्याओं को करीब से समझने का प्रयास किया। उन्होंने कई वाइब्रेंट विलेज का दौरा किया और ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि प्रवास भी किया। दौरों के दौरान जिला अधिकारियों के साथ विकास योजनाओं की समीक्षा की गई और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को जाना गया। इसके साथ ही केंद्रीय संस्थानों के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

राज्यपाल ने बताया कि राजभवन की प्रेरणा से विभिन्न विषयों पर प्रकाशनों को बढ़ावा दिया गया। उनका कहना है कि किसी भी राज्य की संस्कृति, उपलब्धियों और विकास कार्यों का दस्तावेजीकरण भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। भविष्य की प्राथमिकताओं को लेकर राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड को तकनीक आधारित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के लिए एआई संस्कृति को बढ़ावा देना जरूरी है। इसके साथ ही नशामुक्त उत्तराखंड अभियान को जन आंदोलन बनाने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखकर ही प्रदेश का सामाजिक और आर्थिक भविष्य मजबूत किया जा सकता है। राज्यपाल के अनुसार, संवैधानिक पद तभी प्रभावी होता है जब वह समाज को प्रेरित करने, नई पहल शुरू करने और विकास के लिए संस्थाओं को एक मंच पर लाने का माध्यम बने। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षा, तकनीक, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में किए गए प्रयास आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के विकास की मजबूत आधारशिला साबित होंगे।

 

 

 

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