उत्तराखंड में सड़क-पुलों की बहाली पर फोकस, 461.87 करोड़ के बजट की दरकार..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में आपदा के बाद क्षतिग्रस्त सड़क और पुलों की मरम्मत का काम जारी है। लोक निर्माण विभाग के मुताबिक प्रभावित सड़कों को पूरी तरह बहाल करने के लिए 461.87 करोड़ रुपये की जरूरत है। लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने विभागीय समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने और काम की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए। यमुना कॉलोनी में हुई समीक्षा बैठक में आपदा से प्रभावित सड़क मार्गों की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की गई। विभाग के अनुसार आपदा के दौरान प्रदेश में 2360 मार्ग क्षतिग्रस्त हुए थे। इनमें से 2329 मार्गों पर यातायात बहाल किया जा चुका है। शेष मार्गों पर भी काम को प्राथमिकता के साथ पूरा करने को कहा गया है।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर रहेगी नजर
सतपाल महाराज ने अधिकारियों से जिलेवार लंबित और निर्माणाधीन सड़कों की रिपोर्ट लेने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क और पुल निर्माण में मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्माण सामग्री से लेकर डामरीकरण, सड़क की मोटाई और लैब टेस्ट तक की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मंत्री ने थर्ड पार्टी क्वालिटी टेस्टिंग को भी प्रभावी बनाने को कहा। निर्माण में किसी तरह की कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या एजेंसी की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं।
199 ब्लैक स्पॉट पर सुधार की जरूरत
समीक्षा में प्रदेश के करीब 199 ब्लैक स्पॉट का भी मुद्दा सामने आया। इन स्थानों पर सड़क सुरक्षा से जुड़े जरूरी सुधार कार्य जल्द पूरा करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में जोखिम को कम करना है। सड़कों पर गड्ढों से जुड़ी शिकायतों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पैचवर्क ऐप पर अब तक 1953 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें से 1327 शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। वहीं 626 शिकायतें अन्य विभागों के अधिकार क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण संबंधित विभागों को भेजी गई हैं। प्रदेश में 34 निष्प्रयोज्य पुलों की जानकारी भी समीक्षा के दौरान सामने आई। इनमें से 21 पुलों को दोबारा उपयोग में लाने की प्रक्रिया चल रही है। अधिकारियों को पुलों का नियमित निरीक्षण करने और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। इसके साथ ही वैकल्पिक मार्गों और डायवर्जन वाले स्थानों पर पर्याप्त साइन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। रोड साइनेज की ऊंचाई और स्पष्टता पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है, ताकि वाहन चालकों को रास्ते की जानकारी समय रहते मिल सके।

