May 21, 2026
उत्तराखंड

जनगणना कार्य में बाधा डालने वालों पर होगी FIR..

जनगणना कार्य में बाधा डालने वालों पर होगी FIR..

उत्तराखंड शासन ने जारी किए सख्त निर्देश..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में जनगणना-2027 के तहत चल रहे मकान सूचीकरण कार्य को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। राज्य में जनगणना कर्मचारियों के साथ लगातार हो रहे असहयोग और अभद्र व्यवहार की शिकायतों के बाद शासन ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जनगणना कार्य में बाधा डालने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जनगणना कार्य निदेशालय उत्तराखंड ने सभी चार्ज अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई व्यक्ति जानकारी देने से इनकार करता है, सरकारी कार्य में व्यवधान उत्पन्न करता है या कर्मचारियों के साथ असहयोग करता है तो उसके खिलाफ जनगणना अधिनियम-1948 के तहत एफआईआर दर्ज कराई जाए।

राज्य के कई जिलों, विशेष रूप से देहरादून समेत अन्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहां जनगणना कर्मचारियों को घर-घर सर्वे के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर लोगों ने अपने घरों के दरवाजे तक नहीं खोले, जबकि कुछ स्थानों पर कर्मचारियों को घंटों तक बाहर इंतजार करना पड़ा। कुछ मामलों में लोगों द्वारा कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। सबसे गंभीर घटनाएं उन इलाकों से जुड़ी बताई जा रही हैं जहां कर्मचारियों के ऊपर पालतू कुत्ते छोड़ दिए गए या उन्हें स्ट्रीट डॉग्स ने काट लिया। इन घटनाओं के बाद जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के बीच असुरक्षा और भय का माहौल बन गया है। शासन ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अब कड़े कदम उठाने का फैसला किया है।

जनगणना कार्य निदेशालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मकान सूचीकरण कार्य राष्ट्रीय महत्व का अभियान है और इसे निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना बेहद जरूरी है। विभाग को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि कई लोग सही जानकारी उपलब्ध कराने से बच रहे हैं। कुछ लोग कर्मचारियों को घरों में प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर मकानों पर लिखे गए जनगणना नंबर तक मिटा दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से जनगणना कार्य प्रभावित हो रहा है और पूरे अभियान में अनावश्यक देरी हो सकती है। शासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना अधिनियम-1948 के तहत प्रत्येक नागरिक का यह कानूनी दायित्व है कि वह जनगणना कर्मचारियों को सही जानकारी उपलब्ध कराए और सरकारी कार्य में पूरा सहयोग करे। आदेश में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पहले लोगों को उनके कानूनी दायित्वों और जनगणना के महत्व के बारे में जागरूक किया जाए। इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर सहयोग नहीं करता है या कार्य में बाधा उत्पन्न करता है तो उसके खिलाफ अधिनियम की धारा-11 के तहत तत्काल मुकदमा दर्ज कराया जाए।

इसके साथ ही संबंधित पुलिस थानों को भी निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि जनगणना कार्य बिना किसी रुकावट के पूरा हो सके। प्रशासन का कहना है कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि भविष्य की विकास योजनाओं की नींव भी है। जनसंख्या, आवास, संसाधनों और सामाजिक संरचना से जुड़े आंकड़ों के आधार पर ही सरकार विभिन्न योजनाओं और बजट का निर्धारण करती है। अधिकारियों का मानना है कि यदि लोग गलत जानकारी देते हैं या कर्मचारियों के साथ असहयोग करते हैं तो इसका सीधा असर विकास योजनाओं और नीति निर्माण पर पड़ सकता है। यही वजह है कि अब प्रशासन जनगणना कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा को गंभीरता से लेते हुए सख्त रवैया अपनाने की तैयारी में है।

 

 

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