February 10, 2026
उत्तराखंड

संविदा और आउटसोर्स भर्ती अब केवल छह माह तक, शासन का सख्त आदेश..

संविदा और आउटसोर्स भर्ती अब केवल छह माह तक, शासन का सख्त आदेश..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में सरकारी विभागों में आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर शासन ने स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। अब नियमित पदों के सापेक्ष केवल उन्हीं मामलों में आउटसोर्स या संविदा नियुक्तियों को अनुमति दी जाएगी, जहां संबंधित पदों पर नियमित भर्ती की प्रक्रिया पहले से चल रही होगी। ऐसे सभी प्रस्तावों की अवधि अधिकतम छह माह या नियमित नियुक्ति होने तक सीमित रहेगी। शासन स्तर पर यह निर्णय उस स्थिति को देखते हुए लिया गया है, जहां कई विभाग स्वीकृत नियमित पदों को नियमित चयन प्रक्रिया से भरने के बजाय संविदा या आउटसोर्स माध्यम से नियुक्तियां करने का प्रयास कर रहे थे। इसे रोकने के लिए कार्मिक विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

अपर सचिव कार्मिक गिरधारी सिंह रावत की ओर से जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि इससे पूर्व 25 अप्रैल 2025 को भी इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं, जिनमें यह स्पष्ट किया गया था कि सभी नियमित रिक्त पदों को अनिवार्य रूप से नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से भरा जाना होगा। इसके बाद 26 अगस्त को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने यह व्यवस्था बनाई थी कि विभागीय प्रस्तावों को कार्मिक विभाग के माध्यम से समिति के समक्ष केस-टू-केस आधार पर प्रस्तुत किया जाएगा। कार्मिक विभाग को प्राप्त हो रहे प्रस्तावों की समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई विभाग नियमित पदों पर संविदा या आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति का प्रस्ताव भेज रहे हैं, जबकि संबंधित पदों की नियमित भर्ती की प्रक्रिया शुरू ही नहीं की गई है। इसी प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए शासन ने अब और सख्ती बरतने का फैसला लिया है।

शासन ने स्पष्ट किया है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति केवल उन्हीं विभागीय प्रस्तावों पर विचार करेगी, जिनमें संबंधित पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरने के लिए अधियाचन संबंधित आयोग या चयन एजेंसी को भेजा जा चुका हो और भर्ती प्रक्रिया वास्तव में गतिमान हो। केवल औपचारिकता के तौर पर प्रस्ताव भेजना मान्य नहीं होगा। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि ऐसे मामलों में संविदा या आउटसोर्स नियुक्ति की अनुमति अधिकतम छह माह या नियमित चयन पूर्ण होने तक जो भी पहले के लिए ही दी जाएगी। विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नियमित भर्ती प्रक्रिया बाधित न हो और उसे समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। शासन के इस निर्णय से एक ओर जहां नियमित भर्ती को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर लंबे समय तक संविदा और आउटसोर्सिंग के सहारे विभागीय कामकाज चलाने की प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद है।

 

 

 

    Leave feedback about this

    • Quality
    • Price
    • Service

    PROS

    +
    Add Field

    CONS

    +
    Add Field
    Choose Image
    Choose Video

    X