raibarexpress Blog उत्तराखंड चमोली में जनजाति समागम, पारंपरिक अंदाज़ में सीएम धामी का अभिनंदन..
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चमोली में जनजाति समागम, पारंपरिक अंदाज़ में सीएम धामी का अभिनंदन..

चमोली में जनजाति समागम, पारंपरिक अंदाज़ में सीएम धामी का अभिनंदन..

 

 

उत्तराखंड: चमोली जनपद के दूरस्थ क्षेत्र बेड़ूबगड़ में आयोजित जनजाति समागम उस समय विशेष बन गया जब सीएम पुष्कर सिंह धामी स्वयं कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। जनजातीय समाज के बीच उनकी उपस्थिति को लेकर क्षेत्र में पहले से ही उत्साह का वातावरण था। सीएम का हेलिकॉप्टर पीपलकोटी के सेमलदाला मैदान में उतरा, जहां स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वे सड़क मार्ग से बेड़ूबगड़ पहुंचे, जहां पारंपरिक वाद्य यंत्रों और लोकधुनों के बीच उनका भव्य अभिनंदन किया गया।

कार्यक्रम स्थल पर भोटिया जनजाति की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक साफ दिखाई दी। पारंपरिक पौणा नृत्य की प्रस्तुति ने समागम को विशेष रंग दिया। स्थानीय महिलाओं और युवाओं ने अपनी वेशभूषा और लोकनृत्य के माध्यम से जनजातीय संस्कृति की जीवंतता को प्रदर्शित किया। भोटिया समुदाय के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को पारंपरिक ऊनी परिधान ‘दोखा’ पहनाकर सम्मानित किया, जो उनके सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक माना जाता है। समागम के दौरान जनजातीय समुदाय से जुड़े मुद्दों, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। स्थानीय लोगों ने क्षेत्रीय समस्याओं और अपेक्षाओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार सीमांत और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि पहाड़ी और सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सरकार का प्रयास है कि विकास की धारा अंतिम छोर तक पहुंचे और जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहते हुए आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित हो। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, महिला मंगल दल, युवा संगठन और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जनजाति समागम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि परंपरा और विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं, बशर्ते संवाद और सहभागिता की प्रक्रिया मजबूत हो।

 

 

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