July 17, 2026
उत्तराखंड

उत्तराखंड में अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए बनेगा विशेष बोर्ड, धामी सरकार की बड़ी पहल..

उत्तराखंड में अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए बनेगा विशेष बोर्ड, धामी सरकार की बड़ी पहल..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार अग्निपथ योजना के तहत सेवा पूरी करने वाले युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार सेवानिवृत्त अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए एक विशेष पुनर्वास बोर्ड गठित करने की तैयारी कर रही है। यदि यह पहल लागू होती है, तो उत्तराखंड ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन सकता है। सरकार का उद्देश्य सेना से लौटने वाले अग्निवीरों को केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें रोजगार, स्वरोजगार और निजी क्षेत्र में भी बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

पहले ही मिल चुका है 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण..

धामी सरकार इससे पहले राज्य की समूह ‘ग’ श्रेणी की सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की घोषणा कर चुकी है। अब सरकार उन युवाओं पर विशेष ध्यान देने की तैयारी में है, जिन्हें सरकारी सेवाओं में स्थान नहीं मिल पाएगा। सूत्रों के अनुसार, ऐसे अग्निवीरों के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई जा रही है, ताकि सेवा समाप्त होने के बाद उन्हें रोजगार के लिए भटकना न पड़े। प्रस्तावित योजना के तहत सेवानिवृत्त अग्निवीरों को उनकी योग्यता और अनुभव के अनुरूप विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके माध्यम से उन्हें स्वरोजगार अपनाने, उद्यम शुरू करने और विभिन्न व्यवसायों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही जो अग्निवीर निजी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहेंगे, उन्हें व्यावसायिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की भी योजना बनाई जा रही है। सरकार का मानना है कि सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त युवा अनुशासन, नेतृत्व और कार्यकुशलता के कारण निजी क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

निजी कंपनियों के सहयोग पर भी विचार

जानकारी के अनुसार, सरकार उद्योग जगत और निजी कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रही है। उद्देश्य यह है कि अग्निवीरों के पहले बैच सहित भविष्य में सेवा पूरी करने वाले युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। इसके लिए विभिन्न औद्योगिक संस्थानों और निजी कंपनियों के साथ साझेदारी की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है, ताकि प्रशिक्षित युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके। अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीरों की सेवा अवधि पूरी होने के बाद उनके पुनर्वास को लेकर राज्य सरकार विशेष तैयारी कर रही है। सरकार की कोशिश है कि प्रत्येक अग्निवीर के लिए रोजगार या आजीविका का उपयुक्त विकल्प सुनिश्चित किया जाए।

केंद्र सरकार की नीति

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले लगभग 25 प्रतिशत अग्निवीरों को प्रदर्शन और आवश्यकता के आधार पर नियमित सैन्य सेवा में बनाए रखने का प्रावधान है। शेष अग्निवीरों के लिए केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न पुनर्वास और रोजगार संबंधी योजनाओं पर कार्य कर रही हैं। हाल के समय में यह भी चर्चा रही है कि भविष्य में सेना की आवश्यकताओं और अग्निवीरों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए नियमित सेवा में रखे जाने वाले जवानों की संख्या बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। उत्तराखंड सरकार की यह पहल यदि अमल में आती है, तो इससे अग्निवीरों को सेवा समाप्ति के बाद बेहतर रोजगार, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिल सकते हैं।

 

 

 

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