गौरीकुंड में तप्त कुंड का पुनर्निर्माण, श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं तैयार..
उत्तराखंड: चारधाम यात्रा से पहले केदारनाथ धाम के प्रमुख आधार शिविर गौरीकुंड में स्थित पौराणिक तप्त कुंड के पुनरुद्धार कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है। वर्ष 2013 की भीषण आपदा में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके इस ऐतिहासिक कुंड को अब नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु एक बार फिर इसके धार्मिक और प्राकृतिक महत्व का लाभ उठा सकें। तप्त कुंड के जीर्णोद्धार के लिए करीब 67 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस परियोजना के तहत न केवल कुंड का पुनर्निर्माण किया जा रहा है, बल्कि महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग चेंजिंग रूम भी बनाए जा रहे हैं। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्नान के दौरान असुविधा नहीं होगी।
बता दे कि 2013 की आपदा में यह तप्त कुंड पूरी तरह मलबे में दब गया था। बाद में स्थानीय लोगों और प्रशासन के प्रयासों से यहां खुदाई कर गर्म पानी के स्रोत को फिर से खोज निकाला गया। हालांकि अस्थायी व्यवस्था के तहत पाइप के जरिए पानी उपलब्ध कराया गया था, लेकिन उचित संरचना और सुविधाओं के अभाव में श्रद्धालु इसका पूरा लाभ नहीं ले पा रहे थे। अब इस ऐतिहासिक स्थल को व्यवस्थित और आकर्षक स्वरूप देने का काम तेजी से किया जा रहा है।इस पुनर्निर्माण कार्य को क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से गति मिली है। स्थानीय स्तर पर इसके सौंदर्यीकरण और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि यह स्थल केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन सके।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गौरीकुंड से ही केदारनाथ यात्रा की शुरुआत मानी जाती है। श्रद्धालु यहां स्थित तप्त कुंड में स्नान कर स्वयं को शुद्ध करते हैं और फिर आगे की यात्रा के लिए प्रस्थान करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने इसी स्थान पर भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिसके कारण इस स्थल का नाम ‘गौरीकुंड’ पड़ा। मान्यता है कि इस कुंड के गर्म जल में स्नान करने से शारीरिक रोगों से राहत मिलती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यही कारण है कि यह स्थान आस्था, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम माना जाता है। प्रशासन का लक्ष्य है कि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले तप्त कुंड का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए, ताकि इस बार यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु बेहतर सुविधाओं के साथ इस पवित्र स्थल का लाभ उठा सकें।

