February 12, 2026
उत्तराखंड

धार्मिक आस्था से रोजगार तक, चारधाम में चढ़ने वाले फूलों से अगरबत्ती बनाने की तैयारी..

धार्मिक आस्था से रोजगार तक, चारधाम में चढ़ने वाले फूलों से अगरबत्ती बनाने की तैयारी..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत धुरी के रूप में भी देखा जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से राज्य को बड़ा राजस्व प्राप्त होता है और हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। इसी आर्थिक श्रृंखला को और सशक्त बनाने की दिशा में अब एक नई पहल की जा रही है, जिसके तहत चारधाम मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूलों का उपयोग कर अगरबत्ती और धूपबत्ती तैयार की जाएगी। इसके साथ ही पहाड़ों में प्रचुर मात्रा में मिलने वाले टिमरू से परफ्यूम बनाने की योजना भी आकार ले रही है। राज्य महिला उद्यमिता विकास परिषद की उपाध्यक्ष विनोद उनियाल ने जानकारी दी कि इस पहल का उद्देश्य धार्मिक आस्था को स्थानीय रोजगार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों को चारधाम मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले पुष्प उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि इनसे धूपबत्ती, अगरबत्ती और अन्य सुगंधित उत्पाद तैयार किए जा सकें। इससे एक ओर मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों का सदुपयोग होगा, वहीं दूसरी ओर महिला समूहों की आय में वृद्धि होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में उगने वाले टिमरू का उपयोग अब परफ्यूम निर्माण में किया जा रहा है। महिला समूहों को इस दिशा में प्रशिक्षित कर उन्हें स्थानीय स्तर पर उत्पादन से जोड़ा जा रहा है। इससे पहाड़ की पारंपरिक वन संपदा को बाजार से जोड़ने का अवसर मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विनोद उनियाल ने केंद्र सरकार के आम बजट को स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि उद्योग विभाग के माध्यम से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें महिलाओं की आजीविका संवर्धन को प्राथमिकता दी गई है। अब तक लाखों महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कार्य किया गया है और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास जारी हैं।

टिहरी क्षेत्र के संदर्भ में उन्होंने कहा कि टिहरी बांध परियोजना के कारण जिले ने अनेक चुनौतियों का सामना किया है। ऐसे में क्षेत्र के विकास और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए कुछ प्रशासनिक मांगें भी रखी गई हैं। उन्होंने संपूर्ण जिले को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की श्रेणी में शामिल करने तथा प्रतापनगर और थौलधार क्षेत्रों को केंद्रीय ओबीसी सूची में जोड़ने का मुद्दा उठाया। इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव आगे बढ़ाए जाने की जानकारी भी दी गई। इसके साथ ही पुरानी टिहरी की प्रतिकृति विकसित करने और बांध प्रभावित मरोड़ा गांव को पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित करने की मांग भी की गई है, ताकि स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके और रोजगार के नए अवसर सृजित हों। चारधाम यात्रा से जुड़ी इस नई पहल को धार्मिक पर्यटन और महिला उद्यमिता के संगम के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह योजना प्रभावी रूप से लागू होती है, तो इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा बल्कि महिला समूहों की आय में भी स्थायी वृद्धि संभव होगी। राज्य सरकार की यह पहल आस्था, आजीविका और आत्मनिर्भरता को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

 

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