पंतनगर यूनिवर्सिटी में ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र की तैयारी, 5 हजार गोवंश संरक्षण का लक्ष्य..
उत्तराखंड: कृषि और तकनीक के क्षेत्र में नए प्रयोगों को बढ़ावा देने के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय ने ड्रोन प्रशिक्षण और गोवंश अनुसंधान से जुड़ी दो महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम शुरू किया है। विश्वविद्यालय को रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (RPTO) के माध्यम से ड्रोन पायलट प्रशिक्षण शुरू करने की अनुमति मिल गई है। इसके बाद उत्तराखंड के युवक-युवतियों को विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण हासिल कर ड्रोन पायलट लाइसेंस की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र को जल्द शुरू करने की तैयारी है। इसके जरिए युवाओं को ड्रोन संचालन से जुड़ी तकनीकी जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की योजना है।
कृषि और पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ेगा ड्रोन का इस्तेमाल
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेंद्र कश्यप ने बताया कि आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक का उपयोग और बढ़ने की संभावना है। खेतों के सर्वेक्षण, फसलों की निगरानी, कृषि रसायनों के छिड़काव समेत कई कामों में ड्रोन उपयोगी साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में भी ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। दुर्गम इलाकों में सर्वेक्षण और कृषि से जुड़े कार्यों को आसान बनाने में ड्रोन की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। कुलपति ने कहा कि तकनीक का लाभ गांवों तक पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित ड्रोन पायलट उपलब्ध होना जरूरी है। इसके लिए भविष्य में गांव और ब्लॉक स्तर तक प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना में टीम की अहम भूमिका
कुलपति डॉ. शिवेंद्र कश्यप ने बताया कि विश्वविद्यालय में ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की प्रक्रिया में डॉ. अजीत नैन, डॉ. अरविंद त्यागी और उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्र को जल्द शुरू किए जाने की योजना है। इस पहल से उत्तराखंड के युवाओं को ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में कौशल हासिल करने के साथ रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है।
65 एकड़ में विकसित होगा गोवंश संवर्धन एवं अनुसंधान केंद्र
पंतनगर विश्वविद्यालय की ओर से गोवंश संरक्षण और कृषि अनुसंधान को जोड़ने के लिए भी एक बड़ी योजना तैयार की गई है। विश्वविद्यालय परिसर में करीब 65 एकड़ भूमि पर ‘भारत रत्न नानाजी देशमुख गोवंश संवर्धन एवं अनुसंधान केंद्र’ विकसित करने की योजना है। विश्वविद्यालय के अनुसार इस केंद्र में गोवंश संरक्षण के साथ प्राकृतिक और जैविक खेती से जुड़े विषयों पर अनुसंधान किया जाएगा। गोबर और गोमूत्र के विभिन्न उपयोगों को लेकर भी वैज्ञानिक अध्ययन किए जाने की योजना है।
पहले चरण में एक हजार गोवंश के संरक्षण की योजना
प्रस्तावित केंद्र में शुरुआत में करीब 1,000 गोवंश के संरक्षण की योजना बनाई गई है। आगे चलकर इसकी क्षमता को बढ़ाकर 5,000 गोवंश तक करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र में गोवंश आधारित कृषि और अन्य संभावित उपयोगों को लेकर प्रयोग किए जाएंगे। इसके साथ ही गोबर से जैविक ऊर्जा और गैस उत्पादन जैसी संभावनाओं पर भी शोध किए जाने की बात विश्वविद्यालय प्रशासन ने कही है। इस केंद्र को प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और पशुपालन से जुड़े अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। पंतनगर विश्वविद्यालय में 3 से 6 अक्टूबर तक अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। मेले में देश के विभिन्न हिस्सों से किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के पहुंचने की संभावना है। इस बार आयोजन में आधुनिक कृषि तकनीक के साथ नवाचार, पारंपरिक कृषि पद्धतियों और एग्री स्टार्टअप्स को भी प्रमुखता दी जाएगी। इसके लिए अलग-अलग विशेष पंडाल तैयार किए जा रहे हैं।
किसान मेले के दौरान कृषि क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोगों, तकनीकी नवाचारों और किसानों के लिए उपयोगी समाधानों की जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। इसी दौरान विश्वविद्यालय की ओर से ड्रोन तकनीक और गोवंश संरक्षण से जुड़ी प्रस्तावित योजनाओं को भी प्रमुखता से सामने रखा जाएगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि कृषि में तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के बेहतर समन्वय से किसानों के लिए नए विकल्प विकसित किए जा सकते हैं। ड्रोन प्रशिक्षण और गोवंश अनुसंधान केंद्र जैसी पहल इसी दिशा में आगे बढ़ाए जाने वाले कदमों के तौर पर देखी जा रही हैं।

