raibarexpress Blog उत्तराखंड राष्ट्रीय घरेलू आय सर्वेक्षण की शुरुआत 1 अप्रैल से, दो साल तक चलेगी प्रक्रिया..
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राष्ट्रीय घरेलू आय सर्वेक्षण की शुरुआत 1 अप्रैल से, दो साल तक चलेगी प्रक्रिया..

राष्ट्रीय घरेलू आय सर्वेक्षण की शुरुआत 1 अप्रैल से, दो साल तक चलेगी प्रक्रिया..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में पहली बार व्यापक स्तर पर राष्ट्रीय घरेलू आय सर्वेक्षण शुरू किए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। यह सर्वेक्षण एक अप्रैल से प्रारंभ होगा और मार्च 2027 तक चलेगा। इस दौरान राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में घर-घर जाकर परिवारों की आय से संबंधित विस्तृत आंकड़े एकत्रित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश और देश की आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके। इस महत्वाकांक्षी सर्वेक्षण को लेकर देहरादून स्थित भारतीय वन सर्वेक्षण सभागार में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों को सर्वे की प्रक्रिया, डेटा संग्रहण और उसके सत्यापन से जुड़ी बारीकियों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सांख्यिकी विभाग के उप महानिदेशक एवं क्षेत्रीय प्रमुख केदार नाथ वर्मा ने बताया कि देश में पहली बार इस तरह का राष्ट्रीय घरेलू आय सर्वेक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सर्वे न केवल आर्थिक आंकड़ों के संग्रह के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य की नीतियों के निर्धारण में भी अहम भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार चयनित परिवारों से वेतन, कृषि, व्यवसाय, मजदूरी और अन्य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी जुटाई जाएगी। इसके लिए प्रशिक्षित टीमें सीधे घरों तक पहुंचेंगी और निर्धारित प्रारूप के अनुसार डेटा एकत्र करेंगी। साथ ही, एकत्रित जानकारी का सत्यापन भी सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि आंकड़े पूरी तरह विश्वसनीय हो सकें।

अधिकारियों ने कहा कि यह सर्वेक्षण ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करेगा। इससे सरकार को विभिन्न वर्गों की आय आर्थिक असमानता और विकास की वास्तविक स्थिति को समझने में मदद मिलेगी, जिसके आधार पर योजनाएं अधिक प्रभावी ढंग से तैयार की जा सकेंगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने सर्वेक्षण से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। माना जा रहा है कि इस सर्वे के माध्यम से राज्य और देश की आर्थिक तस्वीर को और अधिक स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा, जिससे नीतिगत निर्णयों को मजबूती मिलेगी।

 

 

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