February 10, 2026
उत्तराखंड

ग्रामीण रोजगार नीति में बड़ा फेरबदल, MGNREGA के स्थान पर ‘विकसित भारत’ मिशन का प्रस्ताव..

ग्रामीण रोजगार नीति में बड़ा फेरबदल, MGNREGA के स्थान पर ‘विकसित भारत’ मिशन का प्रस्ताव..

 

देश-विदेश: केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार नीति में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह एक नया कानून लाने का प्रस्ताव सामने आया है। खबरों के मुताबिक सरकार द्वारा तैयार किए गए इस विधेयक की प्रतियां लोकसभा सांसदों को वितरित कर दी गई हैं और इसे मौजूदा शीतकालीन सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार आज इसे पेश किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है। प्रस्तावित बिल के मसौदे के अनुसार 2005 के मनरेगा अधिनियम को निरस्त कर उसकी जगह ‘विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025’ लाने की योजना है।

इस नए कानून के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका की व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित करने का प्रस्ताव रखा गया है। बताया जा रहा है कि नए विधेयक में केवल मजदूरी आधारित कार्यों तक सीमित न रहते हुए कौशल, आजीविका, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और स्थायी रोजगार जैसे पहलुओं पर अधिक फोकस किया गया है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप रोजगार मॉडल तैयार करना है। हालांकि मनरेगा को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी सामाजिक और आर्थिक अहमियत को देखते हुए इस प्रस्ताव पर व्यापक चर्चा और राजनीतिक बहस की संभावना भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नया कानून लागू किया जाता है तो इसका ग्रामीण मजदूरों, पंचायतों और राज्यों पर व्यापक असर पड़ेगा। अब सबकी नजरें संसद में इस विधेयक की पेशी और उस पर होने वाली चर्चा पर टिकी हैं, क्योंकि यह बदलाव ग्रामीण रोजगार व्यवस्था की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित कर सकता है।

 

क्या है मनरेगा?

जानकारी के लिए बता दें कि मनरेगा का पूरा नाम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम है। इसे वर्ष 2005 में यूपीए सरकार के कार्यकाल में भारतीय संसद में पेश किया गया था। उस समय इसका नाम NREGA (नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट) था। वर्ष 2009 में इसे महात्मा गांधी के नाम पर मनरेगा किया गया। इस कानून के तहत ग्रामीण इलाकों में प्रत्येक परिवार को हर वर्ष 100 दिनों के गारंटीशुदा रोजगार का प्रावधान किया गया था। अब सरकार इस कानून को समाप्त कर नए रोजगार और आजीविका मॉडल को लागू करने की तैयारी में है।

प्रस्तावित बिल के अनुसार यह नया कानून ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत के लिए एक मजबूत और टिकाऊ विकास ढांचा खड़ा करना है। बिल के मसौदे में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2006 में लागू मनरेगा को निरस्त कर उसकी जगह Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin), 2025 को लागू किया जाएगा। इसके तहत गांव के प्रत्येक परिवार को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी देने का प्रस्ताव है, जो मौजूदा मनरेगा के 100 दिनों से अधिक है। सरकार का दावा है कि नया कानून केवल अस्थायी मजदूरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आजीविका, कौशल विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर देगा। हालांकि मनरेगा की सामाजिक भूमिका को देखते हुए इस प्रस्ताव पर संसद और राजनीतिक गलियारों में व्यापक बहस होने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो यह ग्रामीण रोजगार नीति में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा, जिसका असर देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों पर पड़ेगा।

 

 

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