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 कुमाऊं की लोककला से सजे मिट्टी के दीये, स्वरोजगार के साथ संस्कृति को दे रहीं पहचान

 कुमाऊं की लोककला से सजे मिट्टी के दीये, स्वरोजगार के साथ संस्कृति को दे रहीं पहचान..

 

उत्तराखंड: दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में सजावटी सामान और दीयों की मांग बढ़ने लगी है। इस बीच हल्द्वानी की महिलाओं ने उत्तराखंड की पारंपरिक लोककला को त्योहार से जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की है। जय देवी मां स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं मिट्टी के साधारण दीयों को पारंपरिक ऐपण कला से सजाकर आकर्षक रूप दे रही हैं। उनकी यह कोशिश लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने के साथ महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार कर रही है।

मिट्टी के दीयों पर उकेर रही हैं उत्तराखंड की पारंपरिक कला
समूह की महिलाएं मिट्टी से बने सामान्य दीयों पर लाल और सफेद रंगों का इस्तेमाल कर ऐपण के पारंपरिक डिजाइन तैयार कर रही हैं। इन दीयों पर बनाई जा रही आकर्षक आकृतियां उत्तराखंड की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं। हाथों से तैयार किए जा रहे ये दीये दीपावली की सजावट के लिए खास आकर्षण बन रहे हैं। इनकी खासियत यह है कि इनमें स्थानीय कला और पारंपरिक शैली का इस्तेमाल किया गया है, जिससे हर दीया अपनी अलग पहचान रखता है।

लोककला को रोजगार से जोड़ने की पहल
महिलाओं का यह प्रयास केवल त्योहार के लिए सजावटी सामान तैयार करने तक सीमित नहीं है। समूह की सदस्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मिट्टी के दीयों को अपनी कला और रचनात्मकता से नया रूप देकर उन्हें बाजार के लिए उपयोगी उत्पाद बना रही हैं। इससे एक ओर उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपण कला को नई पहचान मिल रही है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को अपनी कला के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर भी मिल रहा है। स्वयं सहायता समूह की यह पहल स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने और महिला उद्यमिता को आगे बढ़ाने की दिशा में भी अहम है।

ऐपण के दीये खरीदकर स्थानीय महिलाओं का बढ़ाएं हौसला
समूह की महिलाओं का कहना है कि वे इस दीपावली के लिए विशेष रूप से ऐपण कला से सजे दीये तैयार कर रही हैं, जिनमें उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि इस बार दीपावली पर पारंपरिक ऐपण वाले दीयों को प्राथमिकता दें। इससे स्थानीय महिलाओं की मेहनत को प्रोत्साहन मिलेगा और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में भी सहयोग मिलेगा। मिट्टी के इन दीयों में दीपावली की रोशनी के साथ उत्तराखंड की लोककला और महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की कोशिश भी नजर आ रही है।

 

 

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