raibarexpress Blog उत्तराखंड पलायन छोड़ गांव में स्वरोजगार की राह, पाबौ की 12 महिलाएं पोल्ट्री फार्म से बन रहीं आत्मनिर्भर..
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पलायन छोड़ गांव में स्वरोजगार की राह, पाबौ की 12 महिलाएं पोल्ट्री फार्म से बन रहीं आत्मनिर्भर..

 

..पलायन छोड़ गांव में स्वरोजगार की राह, पाबौ की 12 महिलाएं पोल्ट्री फार्म से बन रहीं आत्मनिर्भर

 

 

उत्तराखंड: गांवों में रोजगार की कमी और पलायन की समस्या के बीच पौड़ी जिले के पाबौ विकासखंड से स्वरोजगार की एक प्रेरक तस्वीर सामने आई है। यहां भराड़ी देवी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पोल्ट्री फार्म के जरिए अपनी आजीविका चला रही हैं। पिछले पांच वर्षों से संचालित इस व्यवसाय से जुड़ी 12 महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ काम करते हुए परिवार की आमदनी बढ़ाने में योगदान दे रही हैं। समूह की इस पहल से महिलाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों का रुख करने के बजाय अपने गांव में ही काम करने का अवसर मिला है। सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण और सामूहिक प्रयासों के सहयोग से शुरू हुआ यह व्यवसाय अब स्थानीय स्तर पर आजीविका का माध्यम बन रहा है।

छह लाख रुपये की मदद से शुरू हुआ कारोबार
भराड़ी देवी स्वयं सहायता समूह के अध्यक्ष सुधीर रावत के मुताबिक, पोल्ट्री फार्म की शुरुआत ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से की गई थी। परियोजना के तहत समूह को छह लाख रुपये का ऋण मिला, जबकि मनरेगा के माध्यम से फार्म के लिए शेड तैयार किया गया। इससे व्यवसाय शुरू करने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं जुटाने में मदद मिली। उन्होंने बताया कि पोल्ट्री फार्म ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का अच्छा विकल्प बन सकता है। इच्छुक युवा और समूह सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर इस तरह के व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। उन्होंने इस काम में सहयोग देने के लिए प्रदेश सरकार और ग्रामोत्थान परियोजना का आभार जताया। इस पहल में संतोष रावत की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। दिल्ली से अपने गांव लौटने के बाद उन्होंने पोल्ट्री फार्म के काम से जुड़ने का फैसला किया। उनके मुताबिक, समूह में करीब 10 से 12 महिलाएं काम कर रही हैं और गांव में ही रहकर अपनी आजीविका में योगदान दे रही हैं।

फार्म में पहले चरण के दौरान 1,500 चूजों के साथ उत्पादन शुरू किया गया था। इसके बाद दूसरे चरण में भी चूजे लाकर कारोबार को आगे बढ़ाया गया। संतोष रावत का कहना है कि गांव में ही रोजगार उपलब्ध होने से स्थानीय लोगों को काफी सहूलियत मिलती है। उन्होंने युवाओं से भी स्वरोजगार के विकल्प तलाशने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। ग्रामोत्थान परियोजना के प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने बताया कि समूह को कारोबार आगे बढ़ाने के लिए परियोजना से छह लाख रुपये और बैंक से तीन लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया। इस आर्थिक सहयोग से पोल्ट्री फार्म की स्थापना और संचालन में मदद मिली। उन्होंने बताया कि समूह में तैयार होने वाली मुर्गियों की बिक्री आसपास के क्षेत्रों में की जा रही है। इसके अलावा परियोजना की ओर से विपणन और अन्य जरूरी सुविधाओं में सहयोग दिया जा रहा है, ताकि महिलाओं का व्यवसाय आगे बढ़ सके और उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए बाजार उपलब्ध रहे।

गांव में रोजगार से पलायन रोकने की उम्मीद
भराड़ी देवी स्वयं सहायता समूह की यह पहल दिखाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल करके रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। खासकर महिलाओं के लिए ऐसे व्यवसाय आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। गांव में ही काम मिलने से परिवारों को रोजगार के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलता है। पाबौ में चल रहा यह पोल्ट्री फार्म स्थानीय महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी एक प्रयास है। यदि ऐसे प्रयासों को बाजार और वित्तीय सहायता मिलती रहे, तो दूसरे ग्रामीण परिवार भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित हो सकते हैं।

 

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