मुनस्यारी के खलिया बुग्याल में अवैध टेंट पर कार्रवाई..
सात टूर ऑपरेटरों पर जुर्माने की तैयारी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के प्रसिद्ध खलिया बुग्याल में नियमों को ताक पर रखकर पर्यटकों को ठहराने का मामला सामने आया है। वन विभाग की अनुमति के बिना यहां 18 टेंट लगाए गए थे। इन टेंटों में पर्यटकों को ठहराकर टूर ऑपरेटर कमाई कर रहे थे। मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए सात टूर ऑपरेटरों के चालान किए और अवैध रूप से लगाए गए टेंट हटवा दिए। अब संबंधित ऑपरेटरों पर जुर्माना निर्धारित करने की प्रक्रिया चल रही है।
निर्धारित सीमा से अधिक लगाए गए टेंट
मुनस्यारी स्थित खलिया बुग्याल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बुग्याल में टेंट लगाने के लिए नियम निर्धारित हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत यहां अधिकतम 12 टेंट लगाने की अनुमति है। इसके लिए वन विभाग से मंजूरी लेना और निर्धारित शुल्क जमा करना भी जरूरी है। क्षेत्र में पक्के निर्माण पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद वन विभाग की जांच में खलिया बुग्याल में कुल 30 टेंट पाए गए। इनमें से 18 टेंट निर्धारित सीमा से अधिक और बिना अनुमति लगाए गए थे। विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और नियमों का उल्लंघन करने वाले सात टूर ऑपरेटरों के खिलाफ चालान की कार्रवाई की। अवैध टेंट हटाने के साथ ही अब जुर्माने की राशि का आकलन किया जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित जुर्माना जमा नहीं करने वाले ऑपरेटरों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
अवैध कैंपिंग से बुग्याल की जैव विविधता पर खतरा
खलिया बुग्याल पर्यावरण और जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां बुरांश और भोजपत्र जैसी वनस्पतियों के साथ राज्य पक्षी मोनाल सहित कई तरह के वन्यजीव और पक्षी पाए जाते हैं। प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह क्षेत्र पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टेंट लगाने के लिए जमीन खोदने और अन्य गतिविधियों से बुग्याल के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंच रहा है। यदि ऐसी गतिविधियों पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका असर स्थानीय पर्यावरण पर पड़ सकता है।मल्ला जोहार विकास समिति के अध्यक्ष श्रीराम सिंह धर्मसक्तू ने खलिया बुग्याल में हो रही गतिविधियों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से मुनस्यारी नगर और पर्यटकों के लिए पेयजल उपलब्ध कराने वाली योजना जुड़ी हुई है। उनका कहना है कि बुग्याल में अनियंत्रित कैंपिंग और जमीन की खुदाई से जल स्रोतों के दूषित होने का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
जुर्माने के आकलन में जुटा वन विभाग
वन विभाग की ओर से अवैध टेंट लगाने वाले ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब जुर्माना तय किया जाएगा। विभाग का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को निर्धारित राशि जमा करनी होगी। ऐसा नहीं करने पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर पर्यटन गतिविधियों के संचालन में नियमों के पालन और संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्रों के संरक्षण की जरूरत को सामने रखा है।

