पतंजलि योगपीठ में जड़ी-बूटी दिवस का आयोजन, आचार्य बालकृष्ण के जन्मदिवस पर रक्तदान शिविर..
उत्तराखंड: आयुर्वेदाचार्य एवं पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिवस इस वर्ष भी ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में मनाया गया। हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में आयोजित कार्यक्रम में आयुर्वेद, योग और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित कई गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रक्तदान शिविर की शुरुआत के साथ आयुर्वेद विषय पर आधारित नई पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर योग गुरु स्वामी रामदेव, पतंजलि योगपीठ के वरिष्ठ पदाधिकारी, योगाचार्य, वैज्ञानिक, वैद्य और बड़ी संख्या में साधक मौजूद रहे। सभी ने आचार्य बालकृष्ण को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।
आयुर्वेद पर आधारित 40 पुस्तकों का हुआ लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेद और स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ी 40 पुस्तकों का विमोचन किया गया। इन पुस्तकों का उद्देश्य आयुर्वेद के सिद्धांतों, औषधीय पौधों के महत्व और प्राकृतिक जीवनशैली को आम लोगों तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में ऐसे साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका है।योग गुरु स्वामी रामदेव ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में योग और आयुर्वेद ने विश्वभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि आज करोड़ों लोग स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए योग और आयुर्वेद की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने सभी से भारतीय ज्ञान परंपरा, सनातन संस्कृति और प्राकृतिक चिकित्सा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि उनका जन्मदिन पिछले लगभग तीन दशकों से ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य औषधीय पौधों के संरक्षण, संवर्धन और अधिक से अधिक पौधरोपण के माध्यम से पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि पतंजलि योगपीठ से जुड़े स्वयंसेवकों, संस्थाओं और समर्थकों की ओर से अब तक देशभर में करोड़ों औषधीय पौधे लगाए जा चुके हैं। यह अभियान जैव विविधता के संरक्षण के साथ लोगों को औषधीय पौधों के महत्व के प्रति जागरूक करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।जन्मदिवस समारोह के दौरान आयोजित रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। आयोजकों ने कहा कि रक्तदान जैसे सामाजिक कार्यों को जनआंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सके। कार्यक्रम में योग, आयुर्वेद, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा को एक साथ जोड़ते हुए लोगों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा औषधीय पौधों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की गई।


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