June 30, 2026
उत्तराखंड

एसआईआर ड्यूटी में लापरवाही पड़ी भारी, आठ शिक्षकों और कर्मियों का जून का वेतन रोका..

एसआईआर ड्यूटी में लापरवाही पड़ी भारी, आठ शिक्षकों और कर्मियों का जून का वेतन रोका..

 

उत्तराखंड: निर्वाचन संबंधी महत्वपूर्ण कार्यों में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) अभियान के दौरान ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले आठ शिक्षकों और कर्मचारियों का जून माह का वेतन रोकने के आदेश जारी किए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा और भविष्य में भी ऐसी स्थिति सामने आने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह कार्रवाई जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में की गई है। आदेश में कहा गया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े कार्यों में नियुक्त प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी तय होती है, ऐसे में ड्यूटी से बिना अनुमति अनुपस्थित रहना गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

एसआईआर अभियान के तहत मिली थी जिम्मेदारी

शिक्षा विभाग के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम-2026 के अंतर्गत जिले में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है। इस अभियान के तहत विभिन्न मतदान केंद्रों पर तैनात बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की सहायता के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों को सहयोगी के रूप में नियुक्त किया गया था। इन कार्मिकों की जिम्मेदारी मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य को समयबद्ध और सुचारु रूप से पूरा कराने में सहयोग देना था, ताकि निर्वाचन प्रक्रिया बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके। विभागीय समीक्षा के दौरान पाया गया कि नियुक्त किए गए कुछ शिक्षक और कर्मचारी निर्धारित ड्यूटी स्थल पर उपस्थित नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति के कारण मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य की गति प्रभावित हुई और प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी। इसी लापरवाही को गंभीर मानते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी ने संबंधित आठ कर्मचारियों और शिक्षकों का जून माह का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश जारी किए हैं।

शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि निर्वाचन प्रक्रिया संवैधानिक और अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व है। ऐसे कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न केवल सरकारी व्यवस्था को प्रभावित करती है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और समयबद्ध संचालन पर भी असर डाल सकती है। विभाग ने सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में निर्वाचन अथवा अन्य विशेष सरकारी दायित्वों के दौरान उन्हें सौंपे गए कार्यों का पूरी जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ निर्वहन करें। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवाओं में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी को अपने दायित्वों का ईमानदारी से पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित पाया जाता है या सरकारी कार्यों में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके विरुद्ध सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्वाचन से जुड़े सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे किए जाने हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।

प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि निर्वाचन कार्यों में अनुशासन बनाए रखने के लिए आगे भी नियमित निगरानी की जाएगी। यदि किसी अधिकारी, शिक्षक या कर्मचारी की ओर से सरकारी कार्यों में लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार वेतन रोकने, विभागीय कार्रवाई अथवा अन्य अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित कार्मिकों से निर्वाचन प्रक्रिया को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग देने और अपने दायित्वों का समयबद्ध तरीके से निर्वहन करने की अपील की है।

इन कर्मियों पर हुई कार्रवाई

मुख्य शिक्षा अधिकारी ने संतोष रमोला, गीता राणा, शोभा जुगरान, नमिता डोभियाल, गुलाब सिंह राणा, अरुण रावत, सोमा शाह और ममता रावत का वेतन रोकने का आदेश दिया है।

 

 

    Leave feedback about this

    • Quality
    • Price
    • Service

    PROS

    +
    Add Field

    CONS

    +
    Add Field
    Choose Image
    Choose Video

    X