April 3, 2026
उत्तराखंड

ग्रीन सेस पर संकट, शरारती तत्वों से विभाग को लाखों का नुकसान..

ग्रीन सेस पर संकट, शरारती तत्वों से विभाग को लाखों का नुकसान..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की तैयारियों के बीच परिवहन विभाग की ग्रीन सेस वसूली व्यवस्था को लेकर नई चुनौती सामने आई है। राज्य में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से वसूले जा रहे ग्रीन सेस से जहां सरकार को अच्छी आय की उम्मीद है, वहीं कुछ शरारती तत्व इस व्यवस्था में बाधा डाल रहे हैं।दरअसल, नारसन बॉर्डर समेत कई एंट्री प्वाइंट्स पर लगाए गए एएनपीआर सिस्टम (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों की केबल काटे जाने के मामले सामने आए हैं। इसके चलते बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की पहचान और उनसे ग्रीन सेस की वसूली प्रभावित हो रही है।

परिवहन विभाग के अनुसार 15 मार्च से ग्रीन सेस वसूली शुरू होने के बाद से अब तक राज्य को करीब 6 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है, जबकि प्रतिदिन औसतन लगभग 20 लाख रुपये की आय हो रही है। आगामी चारधाम यात्रा के दौरान लाखों वाहनों के राज्य में प्रवेश करने की संभावना है, जिससे राजस्व में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालांकि मौजूदा व्यवधान विभाग की योजनाओं पर असर डाल सकता है। अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने बताया कि धर्मपुर, काशीपुर और नारसन क्षेत्र में कई बार कैमरों की केबल काटे जाने की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं के कारण कई वाहनों से ग्रीन सेस की वसूली नहीं हो सकी।

विभाग ने स्थिति से निपटने के लिए सर्विलांस कैमरे भी लगाए हैं, लेकिन यहां भी तकनीकी सीमाएं सामने आ रही हैं। आईटीडीए के सर्वर में सीमित स्टोरेज होने के कारण कैमरों का डेटा केवल एक दिन तक ही सुरक्षित रह पाता है। इससे घटनाओं की पुष्टि और दोषियों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। अब विभाग सर्वर क्षमता बढ़ाकर कम से कम एक महीने तक डेटा सुरक्षित रखने की योजना पर काम कर रहा है।

इसके साथ ही बॉर्डर क्षेत्रों में बिजली कटौती भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। सीमित यूपीएस बैकअप के चलते सिस्टम बार-बार बाधित हो रहा है। इसे देखते हुए विभाग संवेदनशील स्थानों, विशेषकर नारसन बॉर्डर पर जनरेटर लगाने की योजना पर विचार कर रहा है, जहां से राज्य में 40 से 50 प्रतिशत ट्रैफिक प्रवेश करता है। अधिकारियों का मानना है कि कुछ लोग जानबूझकर ग्रीन सेस से बचने के लिए इस तरह की गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं, जबकि कुछ शरारती तत्व भी बिना कारण ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। फिलहाल ऐसे चार मामलों की पुष्टि हो चुकी है और विभाग जल्द ही इसका स्थायी समाधान निकालने की दिशा में काम कर रहा है। चारधाम यात्रा से पहले इस व्यवस्था को सुचारु बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है, ताकि न केवल राजस्व में वृद्धि हो, बल्कि राज्य में प्रवेश करने वाले वाहनों की निगरानी भी प्रभावी ढंग से की जा सके।

 

 

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