March 19, 2026
उत्तराखंड

इस बार भी आसान नहीं होगी यात्रा, गंगोत्री हाईवे पर अब भी मंडरा रहा खतरा..

इस बार भी आसान नहीं होगी यात्रा, गंगोत्री हाईवे पर अब भी मंडरा रहा खतरा..

 

 

उत्तराखंड: चारधाम यात्रा के आगाज से पहले जहां एक ओर शासन-प्रशासन तैयारियों को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। आगामी 19 अप्रैल से गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ यात्रा शुरू होनी है, लेकिन इस महत्वपूर्ण मार्ग की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। उत्तरकाशी से गंगोत्री तक जाने वाला हाईवे पिछले वर्ष आई आपदा के बाद से पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाया है। करीब आठ महीने बीत जाने के बावजूद सड़क के सुधारीकरण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाए हैं। कई स्थानों पर अब भी भूस्खलन के निशान साफ दिखाई देते हैं और सड़कें कई जगहों पर क्षतिग्रस्त व धंसी हुई हैं।

बीते वर्ष अगस्त में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान लेम्चागाड, सोनगाड, डबरानी, नलूणा, भटवाड़ी और ओंगी जैसे क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ था। भूस्खलन के कारण सड़कें बह गईं या धंस गईं, जिससे आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। हालांकि आपदा के बाद अस्थायी रूप से मार्ग बहाल किया गया, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कार्य अब तक नजर नहीं आ रहा है। स्थिति यह है कि कई संवेदनशील स्थानों पर आज भी पहाड़ियों से मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर लटके हुए हैं, जो हल्की बारिश या मौसम में बदलाव के साथ कभी भी नीचे गिर सकते हैं। खासतौर पर नेताला, नलूणा, बिशनपुर, भटवाड़ी से संगलाई और डबरानी के आसपास के क्षेत्र भूस्खलन के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील बने हुए हैं।

सोनगाड क्षेत्र में सड़क का एक हिस्सा बह जाने के बाद सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा अस्थायी रूप से मलबा और पत्थर डालकर यातायात चालू कराया गया था, लेकिन वहां भी स्थायी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने पर सड़क के दोबारा बहने का खतरा बना हुआ है। इसी तरह भटवाड़ी और अन्य स्थानों पर धंसती सड़कें आने वाले समय में फिर से परेशानी का कारण बन सकती हैं। हालांकि कुछ स्थानों पर सीमित स्तर पर सुरक्षात्मक कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन पूरी सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर काम की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रशासन द्वारा सीमा सड़क संगठन को 30 मार्च तक हाईवे को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन अभी तक कार्यों की रफ्तार संतोषजनक नहीं मानी जा रही है।

हर्षिल, धराली और भैरों घाटी जैसे क्षेत्रों में भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है। कई जगहों पर अब भी पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। चारधाम यात्रा के शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में गंगोत्री हाईवे की वर्तमान स्थिति प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती के रूप में खड़ी है। यदि समय रहते स्थायी और प्रभावी सुधार कार्य नहीं किए गए, तो यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

 

 

 

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