February 10, 2026
उत्तराखंड

नए साल में हजारों उपनल कर्मियों को मिला संबल, धामी सरकार ने पूरी की वर्षों पुरानी मांग..

नए साल में हजारों उपनल कर्मियों को मिला संबल, धामी सरकार ने पूरी की वर्षों पुरानी मांग..

 

 

 

 

उत्तराखंड: प्रदेश सरकार ने वर्षों से उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों की एक लंबे समय से लंबित और अहम मांग को आखिरकार पूरा कर दिया है। सरकार के इस निर्णय से जहां तत्काल तौर पर सात से आठ हजार उपनल कर्मियों को राहत मिलेगी, वहीं आने वाले समय में इसका लाभ बाद में नियुक्त होने वाले कर्मचारियों को भी मिल सकेगा। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, उपनल कर्मियों को समान पद के अनुरूप समान वेतन देने की व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक कर्मी इस फैसले के दायरे में आ सकें और वर्षों से चली आ रही वेतन असमानता को धीरे-धीरे समाप्त किया जा सके। इस फैसले की सबसे अहम बात यह है कि अब उपनल कर्मी उपनल के माध्यम से नहीं, बल्कि संबंधित विभागों के साथ सीधे अनुबंध पर कार्य करेंगे। इससे उनकी कार्यस्थल पर स्थिति और जिम्मेदारियां अधिक स्पष्ट होंगी तथा उन्हें विभागीय कार्मिकों के समान कार्य वातावरण मिलेगा।

वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न विभागों में 20 हजार से अधिक उपनल कर्मी सेवाएं दे रहे हैं। ये सभी लंबे समय से समान कार्य करने के बावजूद समान वेतन न मिलने को लेकर असंतोष जता रहे थे। पूर्ववर्ती सरकारों ने समय-समय पर मानदेय में बढ़ोतरी जरूर की, लेकिन वह बढ़ोतरी इतनी कम थी कि उससे कर्मचारियों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पाई। स्थिति यह थी कि कई विभागों में उपनल कर्मियों से अधिक मानदेय होमगार्ड और पीआरडी के जवानों को मिल रहा था, जबकि कार्यभार और जिम्मेदारियां लगभग समान थीं। प्रदेश सरकार इस असमानता को दूर करने की दिशा में प्रयास कर रही थी, लेकिन बीच में कानूनी और प्रक्रियागत अड़चनें सामने आ रही थीं।

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से मिली दिशा

इन अड़चनों के बीच उपनल कर्मियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले में हाईकोर्ट के निर्णय के बाद सरकार ने उपनल कर्मियों को समान पद, समान वेतन देने के लिए कैबिनेट की एक उप-समिति का गठन किया। इस समिति ने कई बैठकों में उपनल कर्मियों के प्रतिनिधियों का पक्ष सुना और सभी पहलुओं पर विचार किया। उपनल कर्मियों का यह मामला पिछली कैबिनेट बैठक में भी चर्चा में आया था, जहां 12 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मियों को समान पद-समान वेतन देने पर मंथन हुआ था। इसके बाद गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस विषय पर दोबारा विचार किया गया।

10 वर्ष की सेवा वालों को पहले चरण में लाभ..

लंबी चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि अधिकतम कर्मियों को लाभ देने के लिए इस व्यवस्था को चरणबद्ध रूप से लागू किया जाए। पहले चरण में वर्ष 2025 तक 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले उपनल कर्मियों को समान पद के अनुरूप समान वेतन दिया जाएगा। इन कर्मचारियों को उनके पद के सापेक्ष बेसिक वेतन प्रदान किया जाएगा। कैबिनेट ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में शेष उपनल कर्मियों को भी इस व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा, ताकि किसी के साथ भेदभाव न हो और सभी को समान अवसर मिल सके। सरकार के इस फैसले से उपनल कर्मियों में नई उम्मीद जगी है। वर्षों से वेतन असमानता झेल रहे कर्मचारियों को अब न केवल आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है, बल्कि उन्हें एक स्थिर और सम्मानजनक कार्य व्यवस्था भी मिल सकेगी।

 

 

 

 

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